
उत्तराखंड के 108 नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों की सूरत जल्द बदलेगी। शहरी विकास विभाग ने इसके लिए केंद्र सरकार के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए) को अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी है।
प्रदेश के नगर निकायों की सबसे बड़ी चुनौती कमाई की है। कुछ नगर निगमों को छोड़ दें तो ज्यादातर निकाय केंद्र व राज्य सरकार की इमदाद के भरोसे हैं। पिछले वित्तीय आंकड़े देखें तो कुल खर्च के सापेक्ष इनकी स्वयं की कमाई महज 22.8 प्रतिशत तक है।
दूसरी बड़ी चुनौती मानव संसाधन की है। वर्षों से निकायों में सफाई कर्मचारियों की भर्ती नहीं हुई। निकायों में कामचलाऊ व्यवस्था है। वहीं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के मामले में भी निकायों में व्यवस्थाएं काफी कमतर हैं। इन सभी चुनौतियों का निपटारा करने के लिए शहरी विकास विभाग ने सभी निकायों के विस्तृत अध्ययन की जिम्मेदारी एनआईयूए को सौंपी है। यह सभी पहलुओं पर पूरी रिपोर्ट तैयार करने के बाद शासन को उपलब्ध कराएगा।
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