पैनेसिया अस्पताल के आईसीयू में भीषण आग से निकल रहीं लपटों ने 60 वर्षीय बुजुर्ग वीरवती को हमेशा के लिए लपेट लिया। चारों तरफ आग होने से बेटा कमल बेबस होकर बस देखता ही रह गया। राहत बचाव टीम ने उन्हें बाहर निकालकर दूसरे अस्पताल भेजा लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं।
आग की चपेट में आए 16 लोग अभी उपचार ले रहे हैं। इनमें से चार की हालत बेहद नाजुक है। घटना में अपनी मां को खो चुके कमल अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहते हैं कि दो दिन पहले मां को भर्ती कराया था। वह घर पर गिर गईं थीं। उनको काफी चोटें आई थीं। उनको शुगर की भी शिकायत थी। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। जब सुबह आग लगी तो आईसीयू के बाहर धुंआ आता दिखाई दिया। वह बाहर ही बैठे थे। कुछ सेकेंड में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। आईसीयू के अंदर आग की लपटें मरीजों की तरफ बढ़ रहीं थी।
जिस बेड पर उनकी मां भर्ती थीं उसके आस-पास भी आग लगी थी। लपटों ने उनकी मां को झुलसा दिया और अंदर धुआं भरने से उनका दम भी घुटने लगा। मां दर्द से चिल्ला रही थीं। चारों तरफ आग होने की वजह से वह बेबस थे। अस्पताल के कर्मचारी और राहत बचाव दल जब तक मां को बाहर निकाल पाता तब उनकी मौत हो चुकी थी।
आग के बाद मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव दल को जब स्ट्रेचर नहीं मिला तो उन्होंने चादर और बेडशीट के साथ उठाकर मरीजों को नीचे ले जाना पड़ा। मरीजों के चादर तक में आग लगी थी। इससे अस्पताल प्रबंधन के इंतजामों पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। कुछ तीमारदार अपने मरीजों को गोद में उठाकर वहां से बाहर ले गए।
प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि घटना के सभी मरीजों को आनन-फानन बाहर निकाला गया। ऐसे में आईसीयू में भर्ती मरीजों की परेशानी तब बढ़ गई जब उनके शरीर से ऑक्सीजन और वेंटीलेटर सपोर्ट हटा लिया गया। उन्हें पहले से सांस लेने में दिक्कत हो रही थी ऊपर से धुएं ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं। मरीजों के फेफड़ों में एसी की गैस का धुआं भर गया। कैलाश अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक इसकी वजह से मरीजों की हालत गंभीर हुई है। कुछ मरीज जिंदगी-मौत से जूझ रहे हैं।
रेस्क्यू के बाद घायलों को कैलाश अस्पताल ले जाने वाली एक एंबुलेंस में भी आग भड़क गई। इससे वहां पर अफरा-तफरी मच गई। फायर फाइटरों ने मौके पर पहुंचकर तुरंत आग पर काबू पाया। लोगों ने बताया कि घायल को चादर में लपेटकर अस्पताल लाया गया था। आग की चिंगारी चादर में थी। वह रास्ते भर धीरे-धीरे सुलगती रही। एंबुलेंस जैसे ही अस्पताल पहुंची आग भड़क गई। गनीमत रही कि फिर से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
बिखरी पड़ीं मरीजों-तीमारदारों की चप्पलें, टूटी खिड़कियां और बेड घटना के मंजर को बयां कर रहे थे। यह देखकर इस बात का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि घटना कितनी खतरनाक रही होगी। भगदड़ मचने पर मरीजों को सीढ़ियों से उतारा गया।
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