
इस साल गर्मी के सालाना लोड के साथ ही इंडक्शन की वजह से भी करीब 100 मेगावाट का अतिरिक्त भार यूपीसीएल की आपूर्ति पर आ गया है।
जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, बिजली की मांग भी चिंताएं बढ़ा रही हैं। एक मई को मांग चार करोड़ यूनिट थी जो कि अब करीब छह करोड़ यूनिट पर पहुंच गई है। तीन साल पहले प्रदेश में बिजली की मांग 6.6 करोड़ यूनिट तक पहुंची थी। लिहाजा, इस साल भी यूपीसीएल प्रबंधन इस रिकॉर्ड तक पहुंचने के आसार के मद्देनजर इंतजाम करने में जुटा है।
यूपीसीएल के एमडी जीएस बुदियाल ने बताया कि फिलहाल तक की मांग के हिसाब से उपलब्धता पूरी है। कहीं भी घोषित या अघोषित कटौती नहीं की जा रही है। उन्होंने बताया कि आगामी मांग के मद्देनजर हमने अप्रैल में ही तैयारी पूरी कर ली थी। काशीपुर स्थित गैस आधारित ऊर्जा परियोजना गामा से भी करीब 75 मेगावाट बिजली जल्द मिलनी शुरू हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद जो भी मांग बढ़ेगी, उस हिसाब से बाजार से बिजली ली जाएगी।
निदेशक परिचालन एमआर आर्य ने अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर यूपीसीएल की बिजली आपूर्ति का लाइव प्रसारण चला रखा है। वे दिनभर उपलब्ध बिजली, घटती-बढ़ती मांग पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि निगम के इस सॉफ्टवेयर में केंद्रीय पूल और राज्य पूल, सोलर की पूरी बिजली की जानकारी हर 15 मिनट में अपडेट होती है।
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