
देहरादून के अलावा अब नोएडा में भी यूपी एसटीएफ ने एक प्रयोगशाला में नकल का भंडाफोड़ किया और सात लोगों को पकड़ा था। इसमें भी दो लोग देहरादून की प्राथमिकी में वांछित हैं। ऐसे में मामला केवल उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा।
शुरुआत से ही इस बात की जानकारी उत्तराखंड एसटीएफ को लगी थी कि परीक्षा के लिए प्रयोगशालाएं स्थापित करने वालों ने ही सर्वर रूम में छेड़छाड़ कर नकल का तंत्र बनाया है। ऐसे में अब एसएससी परीक्षाओं के इन मामलों की भी व्यापक जांच होती है तो इसमें भी नीट की तरह बड़ी मछलियां जाल में फंस सकती हैं।
दरअसल, उत्तराखंड एसटीएफ ने फरवरी में एमकेपी में स्थापित एक ऑनलाइन लैब में नकल का भंडाफोड़ किया था। इसके बाद से महादेव डिजटल नाम की इस लैब को बंद करा दिया गया। लगातार धरपकड़ हुई और कई बातें एसटीएफ को चौंकाने वाली पता चलीं। गत 16 मई को भी इस गिरोह के एक सदस्य को एसटीएफ ने पकड़ा था। उसी ने देशभर में करीब 500 लैब स्थापित की हैं। इन लैब में से 100 से ज्यादा लैब ऐसी हैं जिनमें उन्होंने सर्वर रूम में अपने गिरोह के कुछ सदस्यों को एक्सेस देकर नकल का तंत्र बनाया। बात सामने आई तो एसटीएफ ने एक लैब को बंद करा दिया। इस मामले में अमित राणा और उसका एक साथी पकड़ से बाहर था।
एसटीएफ उत्तराखंड ने उत्तर प्रदेश एसटीएफ के साथ भी इस जानकारी को साझा किया था। ऐसे में वहां भी एसटीएफ सक्रिय हुई और पिछले दिनों नोएडा के एक सेंटर पर आयोजित हो रही एसएससी की सीएपीएफ, एसएसएफ ओर असम राइफल्स की परीक्षा में नकल का भंडाफोड़ किया। यहां भी उसी पैटर्न पर परीक्षा में नकल कराई जा रही थी जैसे देहरादून के एमकेपी स्थित लैब में प्रबंध किया गया था। ऐसे उत्तराखंड एसटीएफ की जांच की वहां भी पुष्टि हो रही है। यूपी एसटीएफ ने सात आरोपियों में अमित राणा और उसके साथी को भी गिरफ्तार किया है। ऐसे में अब देखने वाली बात है कि आगामी एसएससी की परीक्षाओं की निगरानी का तंत्र मजबूत होता है या इनकी व्यापक जांच कराने के बाद दोबारा परीक्षाएं कराई जाएंगी।
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