
मानसून की शुरुआत के साथ ही मोरी विकासखंड की बड़ासु पट्टी के पांच दूरस्थ गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सांकरी-गंगाड़-ओसला मोटर मार्ग पर हलारा और पूर्ति नालों में जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों का विकासखंड मुख्यालय से संपर्क प्रभावित होने लगा है। उफनते नालों के बीच लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं। दोपहिया वाहनों को पार कराने के लिए पांच से दस लोगों की मदद लेनी पड़ रही है, जबकि बड़े वाहनों और पैदल राहगीरों के लिए भी खतरा बना हुआ है।
स्थानीय निवासी नौनियाल राणा, जनक रावत, जयचंद राणा और वरदान सिंह ने बताया कि हर वर्ष मानसून शुरू होते ही पवाणी, ओसला, गंगाड़, ढाटमीर और तालुका गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। उन्होंने कहा कि पूर्ति और हलारा खड्ड बरसात में उफान पर आ जाते हैं, जिससे आवाजाही जोखिम भरी हो जाती है। कई बार एक वाहन को निकालने के लिए दस से अधिक लोगों की मदद लेनी पड़ती है, लेकिन इसके बावजूद हादसे का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समय क्षेत्र में सेब, राजमा और चौलाई जैसी फसलों की निकासी का समय है। यदि अभी से ऐसी स्थिति बनी हुई है तो बारिश बढ़ने पर पांचों गांवों का संपर्क पूरी तरह से मोरी विकासखंड मुख्यालय और अन्य क्षेत्रों से कट सकता है। उनका कहना है कि खड्डों पर पुल और वैकल्पिक मार्ग बनाने की मांग कई बार पीएमजीएसवाई से की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद पीएमजीएसवाई को सुरक्षा के साथ आवाजाही सुचारु रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मानसून के दौरान जरूरत पड़ने पर आपदा मद से वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने को भी कहा गया है।
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