
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने निर्देश दिए कि प्रदेश में जरूरतमंद बच्चों के लिए हर जिले में बाल कल्याण केंद्र स्थापित किए जाएं। लोकभवन में आयोजित बाल कल्याण परिषद की 17वीं बैठक में उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया।
राज्यपाल ने कहा कि बाल कल्याण परिषद जैसी ऐतिहासिक संस्था को समय के अनुरूप नई सोच, नई कार्यशैली और आधुनिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में बाल कल्याण गतिविधियों को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर प्रभावी बाल कल्याण केंद्र विकसित किए जाएं, जिससे जरूरतमंद बच्चों तक योजनाओं एवं सहायता का लाभ बेहतर ढंग से पहुंच सके। सभी जिलाधिकारियों से समन्वय स्थापित कर बाल कल्याण केंद्रों के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि हमें बच्चों की पेंटिंग प्रतियोगिताएं आयोजित कर संतुष्ट नहीं होना चाहिए, बल्कि आज आवश्यकता इस बात की है कि बच्चों को 21वीं सदी की चुनौतियों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विकसित भारत के विजन के अनुरूप तैयार किया जाए।
राज्यपाल ने कहा कि संसाधनों की कमी से अधिक आवश्यकता सकारात्मक सोच और सामाजिक सहभागिता की है। उन्होंने सीएसआर एवं समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से बाल कल्याण गतिविधियों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया। परिषद के नवनियुक्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों को एक माह के भीतर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। कहा कि शीघ्र ही पुनः समीक्षा बैठक आयोजित कर बाल कल्याण के क्षेत्र में प्रभावी एवं परिणाममूलक निर्णय लिए जाएंगे। इससे पूर्व राज्यपाल ने परिषद के वर्ष 2026-27 के अनुमानित आय-व्यय पर अनुमोदन के साथ ही विभिन्न बिंदुओं पर अपनी सहमति दी।
बैठक में वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त होने के चलते इसे भंग कर नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर डॉ. एस. फारुख, उपाध्यक्ष पद पर मोहन सिंह खत्री व पुष्पा मानस, महासचिव पद पर आशा पैन्यूली, कोषाध्यक्ष पद पर रोहित कोचगवे एवं संयुक्त सचिव पद पर ज्योत्सना खत्री को चुना गया।
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