
दून मेडिकल कॉलेज (जीडीएमसी) के छात्रों की मेस फीस से जुड़े घोटाले का मास्टरमाइंड लेखाकार निलंबित कर दिया गया है। करीब डेढ़ महीने पहले हुए घोटाले में यह पहली बड़ी कार्रवाई है। निदेशालय स्तर पर की गई जांच में भारी अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद कार्रवाई की गई है।
मेस घोटाले का खुलासा 14 मई को अमर उजाला में प्रकाशित खबर में किया गया था। इसके बाद इस मामले में जांच तेज हुई थी। गौरतलब है कि दून मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस 2022, 23, 24 और 25 बैच के छात्रों से मेस संचालक ने मेस शुल्क सीधे अपने निजी खातों में डलवा लिया था।
संचालक ने क्यूआर पर दून मेडिकल कॉलेज लिखवाकर छात्रों को बांट दिए थे। इसके लिए संचालक ने छात्रों की कॉलेज को दिए जाने वाले डिमांड ड्राफ्ट भी वापस करवा दिये थे। इसके लिए उसने लेखा अनुभाग के साथ मिलकर डिमांड ड्राफ्ट निकलवाए थे और उसे रद्द करवाकर छात्रों को वापस कर दिया गया था।
मामले का खुलासा होने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने जांच बैठाई। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने अपने स्तर पर कमेटी बनाकर जांच की। लेखा अनुभाग के कर्मचारियों, वार्डनों और चिकित्सकों को जांच के दायरे में लाया गया था। इस मामले में शुरुआती जांच के बाद लेखा अनुभाग के चार कर्मचारियों का तबादला कर दिया था। साथ ही सभी वार्डन भी बदल दिए गए थे।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को निदेशालय की ओर से लेखाकार को निलंबित कर दिया है। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. गीता जैन को निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक आरोपी लेखाकार उपनल के माध्यम से सेवाएं दे रहा था। प्राचार्य ने उपनल को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से लेखाकार की सेवाएं समाप्त करने के लिए कहा है।
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