January 22, 2022

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2800 करोड़ की CEL को 210 करोड में बेच दिया: कंपनी के 1100 कर्मचारी लामबंद, बोले- जिसे बेचा उन्हें रक्षा उपकरण बनाने का अनुभव ही नहीं

2800 करोड़ की CEL को 210 करोड में बेच दिया: कंपनी के 1100 कर्मचारी लामबंद, बोले- जिसे बेचा उन्हें रक्षा उपकरण बनाने का अनुभव ही नहीं


गाजियाबाद25 मिनट पहले

गाजियाबाद स्थित सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड कंपनी।

रडार समेत कई रक्षा उपकरण बनाने वाली गाजियाबाद (यूपी) की सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) को निजी हाथों में 29 नवंबर 2021 को दे दी गई। ऐसा माना जा रहा है कि अप्रैल-2022 से नंदल फाइनेंस इसका संचालन शुरू कर देगी। इसे लेकर कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। पूरे मामले में PMO, रक्षा मंत्रालय समेत सभी महत्वपूर्ण मंत्रालयों को चिट्ठी भेजी गई है। आरोप लगाया है कि सरकार ने 2800 करोड़ रुपए की संपत्ति 210 करोड़ रुपए में ऐसी कंपनी को बेच दी जो ब्लैक लिस्टेड होने की तरफ है और रक्षा क्षेत्र का अनुभव तक नहीं है।

CEL, साहिबाबाद में रक्षा से जुड़े तमाम उपकरण बनते हैं।

CEL, साहिबाबाद में रक्षा से जुड़े तमाम उपकरण बनते हैं।

रडार, मिसाइल के उपकरण बनाती है यह कंपनी
गाजियाबाद के साहिबाबाद में सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड साल-1974 में केंद्र सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने स्थापित की थी। कहा जाता है कि देश में सबसे पहला सोलर पैनल बनाने वाली यही कंपनी थी। वर्तमान में इस कंपनी में फेज कंट्रोल मॉड्यूल डिवाइस बनती है जो रडार के एंटीना में लगती है। मिसाल में सबसे आगे लगने वाला रोडोम भी यहीं तैयार होता है। इसके अलावा तमाम रक्षा उपकरण बनते हैं। रेलवे के सेफ्टी इक्यूपमेंट मार्केट पर करीब 65% कब्जा CEL का है। इस कंपनी में 1100 कर्मचारी कार्यरत हैं, इनमें करीब 300 कर्मचारी परमानेंट हैं।

केंद्र सरकार ने साल-1974 में गाजियाबाद में यह कंपनी स्थापित की थी।

केंद्र सरकार ने साल-1974 में गाजियाबाद में यह कंपनी स्थापित की थी।

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2016 में निजीकरण की शुरुआत, 2021 में बिड फाइनल
इस कंपनी के निजीकरण की शुरुआत केंद्र सरकार ने साल-2016 में की। 20 जून 2019 तक वित्तीय बोली आमंत्रित की गई, लेकिन कोई खरीदार नहीं आया। इसके बाद 2020 में कोरोना संक्रमण फैल गया। फिर इसकी तारीख बढ़ाकर 15 जुलाई 2020 कर दी गई। इस दौरान तीन निविदाएं प्राप्त हुईं। सरकार ने शर्त यह रखी कि कंपनी का संचालन 3 साल के लिए होगा और कर्मचारियों की नौकरी की गारंटी कम से कम एक साल की होगी। केंद्र सरकार के आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति में शामिल केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण और जितेंद्र सिंह ने 29 नवंबर 2021 को 210 करोड़ रुपए में यह बिड मेसर्स नंदल फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम कर दी।

निजीकरण के खिलाफ कर्मचारी कई दिन से आंदोलन कर रहे हैं।

निजीकरण के खिलाफ कर्मचारी कई दिन से आंदोलन कर रहे हैं।

एम्पलाइज यूनियन ने कहा- CEL की कॉस्ट 2800 करोड़ रुपए
CEL एम्प्लाइज यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार के अनुसार, कंपनी की 50 एकड़ जमीन का वर्तमान सर्किल रेट 440 करोड़ रुपए है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 296 करोड़ रुपए टर्नओवर के साथ सारी देनदारियों को चुकाने के बावजूद इस कंपनी ने 24 करोड़ का लाभ पाया। 1500 करोड़ रुपए के ऑर्डर फिलहाल इस कंपनी को मिले हुए हैं। 34 करोड़ रुपए बिल्डिंग कॉस्ट, 67 करोड़ रुपए वीआरएस, 25 करोड़ रुपए का सैलरी और एरियर समेत इस कंपनी की अनुमानित कीमत करीब 2800 रुपए बैठती है। सरकार ने जिस कंपनी को बिड दी है, उसका कुल सालाना टर्नओवर ही 12 करोड़ रुपए का है। निजीकरण के खिलाफ एम्प्लाइज यूनियन के बैनर तले कर्मचारी पिछले कई दिन से आंदोलनरत हैं।

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पार्षद बोले- विनिवेश प्रक्रिया निरस्त हो
गाजियाबाद में वार्ड-84 के पार्षद राजेंद्र त्यागी ने निजीकरण के खिलाफ एक पत्र पीएम नरेंद्र मोदी को गुरुवार को भेजा है। इसमें उन्होंने कहा है कि एक ऐसी कंपनी नंदल को यह लिमिटेड बेची जा रही है, जिसे रक्षा क्षेत्र का जरा भी अनुभव नहीं है। निजीकरण से कर्मचारी सड़क पर आ जाएंगे। यह सीधे तौर पर देश की रक्षा से खिलवाड़ भी होगा। उन्होंने सीआईएल की विनिवेश प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की है।

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