जयराम आश्रम हरिद्वार में श्रीराम कथा का दिव्य आयोजन | Doonited.India

May 27, 2019

Breaking News

जयराम आश्रम हरिद्वार में श्रीराम कथा का दिव्य आयोजन

जयराम आश्रम हरिद्वार में श्रीराम कथा का दिव्य आयोजन
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

• प्रकृति के प्रति सजग, दयालु और संवेदनशील होना ही समय की मांगः स्वामी चिदानन्द सरस्वती

हरिद्वार: जयराम आश्रम, हरिद्वार में श्रीराम कथा मर्मज्ञ कथाकार मुरलीधर महाराज के मुखारविंद से हो रही है। आज श्री राम कथा के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने सहभाग किया।

श्रीराम कथा का आयोजन जयराम आश्रम भीमगोडा, हरिद्वार में हो रही है। श्रीराम कथा की गंगा जयराम आश्रम में सात दिनों तक प्रवाहित होते रहेगी। कथाकार मुरलीधर महाराज ने भगवान शिव और माता पार्वती के प्रसंग पर प्रकाश डाला। श्री रामकथा के अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने श्रीराम भक्तों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुये कहा कि उत्तराखंड, दिव्य भूमि है, ऋषियों की भूमि है अध्यात्म और शान्ति की भूमि है। गंगोत्री और यमनोत्री के कपाट खुलने के पश्चात केदारनाथ और बद्रीनाथ के भी कपाट खुलने वाले है। इन दिव्यधामों के कपाट खुलने के साथ हमारे दिमाग के भी कपाट खुले ऐसी प्रभु से प्रार्थना है।

उन्होने कहा कि अब समय अपने-अपने दिल के कपाट खोलने का हैय अपनी आँखे खोले ताकि हम प्रकृति के प्रति और सजग हो सकेय दयालु हो सकेय संवेदनशील और सृजनशील हो सके। स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि हनुमान चालीसा में कहा है ’’अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता’’ मुझे लगता है अब अष्ट प्रकृति को अष्टसिद्धि नहीं बल्कि अष्टशुद्धि की जरूरत है यह हमारे जीवन और व्यवहार में हो।

उन्होने कहा कि नवनिधि तो ठीक है परन्तु अब नवधा भक्ति की भी जरूरत है जिससे हम अपने जीवन को परिपूर्ण बना सकते है क्योंकि भक्ति ही जीवन में शक्ति प्रदान करती हैय भक्ति ही जीव का परमात्मा से एकाकार कराती है और भक्ति ही जीवन को सम्पूर्णता प्रदान करती है और यही भक्ति की शिक्षा हमें श्रीराम कथा से प्राप्त होती है।

कथाकार मुरलीधर महाराज ने कहा कि श्री राम कथा वास्तव में शौर्य की, पराक्रम की, प्रकृति संरक्षण की और असुरी शक्तियों के विनाश की कथा है। आज के समय में असुरी शक्तियाँ बाहर से अधिक मनुष्य के दिमाग में है। पहले राक्षस हुआ करते थे आज विचारों में राक्षसी प्रवृतियां है जिससे समाज किसी न किसी रूप से प्रदूषित हो रहा है। इसे समाप्त करने के लिये हमें बच्चों को बचपन से ही संस्कार देने होंगे। श्रीराम कथा हमें समर्पित जीवन जीने की शिक्षा देती है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कथाकार श्री मुरलीधर जी महाराज का अभिनन्दन करते हुये रूद्राक्ष का पौधा भेंट किया।

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

Related posts

error: Be Positive Be United
%d bloggers like this: