May 17, 2022

Breaking News

पिथौरागढ़ ज़िले से मानसरोवर का रास्ता बनाया जा रहा है

पिथौरागढ़ ज़िले से मानसरोवर का रास्ता बनाया जा रहा है

कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए उत्तराखंड से जो रूट तैयार हो रहा है, उसकी गूंज एक बार फिर लोकसभा में सुनाई दी. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं हाईवे मंत्री नितिन गडकरी ने साफ तौर पर कहा कि इस रूट का 85% काम पूरा किया जा चुका है और यह 2024 के चुनाव से पहले यात्रियों के लिए तैयार हो जाएगा. इस बयान में गडकरी ने कहा कि चीन और नेपाल के रास्ते होकर अब मानसरोवर जाने की ज़रूरत न पड़े इसलिए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले से यह रास्ता बनाया जा रहा है, जिसके ज़रिये न केवल यात्रियों का समय बचेगा बल्कि यात्रियों को दुर्गम मार्ग की कठिनाइयों से भी राहत मिलेगी.

बीते मंगलवार यानी 22 मार्च को गडकरी ने लोकसभा में यह बात दोहराई तो उत्तराखंड में बन रहे इस रूट को लेकर एक बार फिर दिलचस्पी पैदा हो गई. हाल में, गडकरी ने पिथौरागढ़ ज़िले की धारचूला तहसील से लिपुलेख तक रोड कनेक्टिविटी हो जाने के संदर्भ में सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ को मुबारकबाद भी दी थी. इस रोड को कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रमुख मार्ग के तौर पर जाना जाता है. इस रूट के बारे में आपको कुछ दिलचस्प बातें बताते हैं.

Connectivity is very important to boost tourism in our country. We have initiated various projects to connect all religious places with quality roads to provide a thrust to religious tourism.: Union Minister Shri @nitin_gadkari ji pic.twitter.com/N0LxJGLuUm

— Office Of Nitin Gadkari (@OfficeOfNG) March 22, 2022

कितना और क्यों खास है ये रूट?


— उत्तराखंड से जुड़ती चीन सीमा पर 80 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जा रही है.
— यह मार्ग लिपुलेख पास से कनेक्ट होता है, जो रणनीतिक रूप से काफी अहम है.
— धारचूला के चीन बॉर्डर से जुड़ने वाले इस मार्ग की समुद्र तल से ऊंचाई 17,000 फीट है.
— इस मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा का समय कई दिन घट जाएगा.
— धारचूला-लिपुलेख रोड वास्तव में पिथौरागढ़-तवाघाट-घटियाबागड़ रोड का विस्तार है.
— यह घटियाबागड़ से शुरू होकर लिपुलेख पास की तरफ मुड़ता है, जो मानसरोवर यात्रा का गेटवे है.
— इस रूट पर यात्रियों को 6000 फीट से 17,060 फीट तक का अल्टिट्यूड मिलेगा.

अभी कैसा है मानसरोवर रूट?


कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए अभी यात्री सिक्किम, उत्तराखंड और नेपाल के काठमांडू के रास्ते तीन तरह से जाते हैं. ये तीनों ही बेहद खतरनाक और थकाऊ रूट हैं, जिनमें समय भी ज़्यादा लगता है और जोखिम भी ज़्यादा होता है. घटियाबागड़ से चीन बॉर्डर पर स्थित लिपुलेख पास वाला जो रूट है, उसे पैदल ही पार करना होता है. इस स्ट्रेच में पांच दिनों का समय लगता है और दुर्घटनाओं की आशंका हमेशा बनी रहती है.

बीआरओ तवाघाट से घटियाबागड़ स्ट्रेच को घटियाबागड़ से लिपुलेख रूट के साथ जोड़ने का बीड़ा उठा चुका है. खबरों की मानें तो इस स्ट्रेच पर वाहन के ज़रिये सिर्फ दो दिनों में यात्रा की जा सकेगी. ​सिक्किम और नेपाल के रास्ते से मानसरोवर यात्रा में अभी दो से तीन हफ्तों का समय लगता है.

Doonited Affiliated: Syndicate News Hunt


Source link

Related posts

Leave a Reply

%d bloggers like this: