September 18, 2021

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ताज होटल के निर्माण की रोचक कथा

ताज होटल के निर्माण की रोचक कथा

ताज होटल के निर्माण की रोचक कथा -ताज होटल के निर्माण के पीछे एक रोचक कहानी छुपी हुई है. सिनेमा के जनक लुमायर भाईयों ने अपनी खोज के छ: महीनों बाद अपनी पहली फिल्म का शो मुम्बई में प्रदर्शित किया था. वैसे तो वे ऑस्ट्रेलिया जा रहे थे, लेकिन बीच रास्ते में उन्होने मुम्बई में भी के शो रखने की बात सोची.7 जुलाई 1896 को उन्होने मुम्बई के आलिशान वाटसन होटल में अपनी 6 अलग अलग फिल्मों के शो आयोजित किए.

इन शो को देखने के लिए मात्र ब्रिटिश लोग आएथे, क्योंकि वाटसन होटल के बाहर एक तख्ती लगी रहती थी, जिस पर लिखा होता था- भारतीय और कुत्ते होटल में नहीं आ सकते हैं.टाटा समूह के जमशेदजी टाटा भी लुमायर भाईयों की फिल्में देखना चाहते थे, लेकिन उन्हें वाटसन होटल में प्रवेश नहीं मिला. रंगभेद की इस घृणित नीति के खिलाफ उन्होनें आवाज उठाई और दो साल बाद वाटसन होटल की आभा को धूमिल कर दे ऐसे भव्य ताज होटल का निर्माण शुरू करवाया.

आर्किटेक्ट सीताराम खांडेराव वैद्य और डीएन मिर्जा ने होटल का डिजाइन बनाया. सीताराम की मृत्यु के बाद अंग्रेज आर्किटेक्ट डब्ल्यू ए चैंबर्स ने इसे पूरा करवाया.1903 में यह अति सुंदर होटल बनकर तैयारहो गई. कुछ समय तक इस होटल के दरवाजे पर एकतख्ती भी लटकती थी जिसपर लिखा होता था – ब्रिटिश और बिल्लियाँ अंदर नहीं आ सकती.लेकिन इतिहासकार शारदा द्विवेदी अपनी किताब में बताती हैं -1896 के वक्त बंबई में प्लेग फैला था, लोग बंबई आने से झिझकते थे. ऐसे समय बंबई के प्रति अपना प्रेम दर्शाने के लिए जमशेदजी ने होटल ताज बनवाया था.

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जानिए ताज किन मायनों में है पहला…16 दिसंबर 1903 को होटल खुला. मुंबई (तब बंबई) का यह पहला होटल था, जिसमें बिजली थी. उस दिन 17 मेहमान इस होटल में थे.होटल ताज देश का पहला होटल था जिसे बार (हार्बर बार) और दिन भर चलने वाले रेस्त्रां का लाइसेंस मिला था. 1972 में देश की पहली 24 घंटे खुली रहने वाली कॉफी शॉप यहीं थी.ताज पहला रेस्त्रां है, जहां सबसे पहले एसी रेस्त्रां बनाया गया था. 1933 में हार्बर बार और एसी रेस्त्रां का निर्माण हुआ था.ताज देश का पहला होटल था, जिसमें इंटरनेशनल स्तर का डिस्कोथेक था. जर्मन एलीवेटर्स लगाए गए थे. तुर्किश बाथ टब और अमेिरकन कंपनी के पंखे लगाए गए थे.ताज देश का पहला ऐसा होटल था, जिसमें अंग्रेज बटलर्स हायर किए गए थे.

शुरुआती चार दशकों तक होटल का किचन फ्रेंच शेफ ही चलाते थे. आतंकी हमले के बाद बराक ओबामा इस होटल में रुकने वाले पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष थे.पहले विश्व युद्ध के दौरान होटल को छह सौ बेड वाले हॉस्पिटल में बदल दिया गया था. होटल की शुरुआत में सिंगल रूम का किराया दस रुपए था. पंखे व अटैच्ड बाथरूम वाले कमरों का किराया Rs.13 था. इतिहासकार शारदा द्विवेदी की किताब में इसका जिक्र है.

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