
राज्य में प्रदर्शन या दंगे के दौरान सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले दंगाइयों से जुर्माने की वसूली की जाएगी। उत्तराखंड लोक व निजी संपत्ति क्षति वसूली अधिनियम की नियमावली को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अधिनियम के तहत दर्ज दावों का निपटारा अधिकरण (ट्रिब्यूनल) के माध्यम से किया जाएगा। ट्रिब्यूनल के फैसले को किसी भी सिविल न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
अधिनियम में दंगा व प्रदर्शन के दौरान किसी की मृत्यु होने पर आठ लाख रुपये व घायल होने पर दो लाख रुपये तक जुर्माने की वसूली की जाएगी। संपत्ति की नुकसान की भरपाई बाजार मूल्य से कम पर नहीं होगी। हड़ताल, बंद, दंगों, लोक उपद्रव या प्रतिवादों के कारण निजी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए याची तीन वर्ष के भीतर निर्धारित न्यायालीय फीस के साथ याचिका दाखिल कर सकेगा।
लोक संपत्ति व सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के मामले में घटना के तीन माह के भीतर प्रतिकर के लिए दावा अधिकरण के सामने दावा याचिका दाखिल करनी होगी। इसके लिए घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट पर आधारित संबंधित पुलिस क्षेत्राधिकारी की रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट या कार्यालय प्रमुख के माध्यम से दावा याचिका दाखिल होगी। कार्यालयाध्यक्ष, कार्यपालक, मुख्य कार्यपालक द्वारा प्राधिकृत कोई व्यक्ति दावा याचिका दाखिल कर सकेगा। इस कानून के तहत उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकेगी, जिन्होंने हड़ताल, बंद, दंगों का नेतृत्व या उनका आह्वान किया।
नियमावली में हड़ताल, बंद, दंगों, लोक अशांति और सड़क जाम के दौरान होने वाली प्रत्येक चल और अचल संपत्ति की क्षति को शामिल किया गया। किसी भी जुलूस या सभा के लिए आवेदन करने पर जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस प्रशासन की शर्तें लागू की जाएगी। प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार के शस्त्र, लाठी, चाकू, ज्वलनशील पदार्थ या खतरनाक रसायनों का प्रयोग पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। प्रत्येक थाने को स्थानीय वीडियो ऑपरेटरों का एक पैनल बनाए रखना होगा ताकि घटनाओं की तत्काल रिकॉर्डिंग की जा सके। साक्ष्य का प्रमाणीकरण के लिए प्रदर्शन समाप्त होते ही संबंधित पुलिस अधिकारी वीडियोग्राफर को मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करेगा, जो वीडियो को प्रमाणित करेगा। वीडियो क्लिपों को वैध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य माना जाएगा।
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