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January 18, 2020

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Human Rights Day हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है

Human Rights Day हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है
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Human Rights Day हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र ने 1950 में दस दिसम्बर के दिन को मानवाधिकार दिवस घोषित किया था जिसका उद्देश्य विश्वभर के लोगों का ध्यान मानवाधिकारों की ओर आकर्षित करना था.

क्या है ‘मानवाधिकार’

हर इंसान को जिंदगी, आजादी, बराबरी और सम्मान का अधिकार ही मानवाधिकार है. भारतीय संविधान इस अधिकार की न सिर्फ गारंटी देता है, बल्कि इसे तोड़ने वाले को अदालत सजा देती है. भारत में 28 सितंबर, 1993 से मानवाधिकार कानून अमल में आया. 12 अक्‍टूबर, 1993 में सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया. वहीं 10 दिसंबर 1948 को ‘संयुक्त राष्ट्र असेंबली’ ने विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र जारी कर पहली बार अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस की घोषणा की थी.

हम कह सकते हैं कि मानव अधिकार वह मानदंड हैं जो मानव व्यवहार के मानकों को स्पष्ट करते हैं. एक इंसान होने के नाते ये वो मौलिक अधिकार हैं जिनका प्रत्येक व्यक्ति स्वाभाविक रूप से हकदार है. ये अधिकार कानून द्वारा संरक्षित हैं.

जीवन का अधिकार: प्रत्येक व्यक्ति के पास अपना स्वतन्त्र जीवन जीने का जन्मसिद्ध अधिकार है.

न्याय का अधिकार : प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष न्यायालय द्वारा निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है. इसमें उचित समय के भीतर सुनवाई, जन सुनवाई और वकील के प्रबंध आदि के अधिकार शामिल हैं.

सोच, विवेक और धर्म की स्वतंत्रता : प्रत्येक व्यक्ति को विचार और विवेक की स्वतंत्रता है, उसे अपने धर्म को चुनने की भी स्वतंत्रता है और अगर वह इसे किसी भी समय बदलना चाहे तो उसके लिए भी स्वतंत्र है.

दासता से स्वतंत्रता: गुलामी और दास प्रथा पर कानूनी रोक है. हालांकि यह अब भी दुनिया के कुछ हिस्सों में इसका अवैध रूप से पालन किया जा रहा है.

अत्याचार से स्वतंत्रता: अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अत्याचार देने पर प्रतिबंध है. हर व्यक्ति अत्याचार न सहने के लिए स्वतंत्र है.

बोलने की स्वतंत्रता : हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक फैसले में इंडियन पीनल कोड की धारा 499 और 500 को संवैधानिक ठहराया है। इन धाराओं में कुछ ऐसे कानून हैं, जो 70 वर्षों से यथावत चले आ रहे हैं। ये कानून आपराधिक निन्दा के बारे में है।

गौर करने की बात है कि अनुच्छेद 19(1) के अंतर्गत हमें बोलने की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार के रूप में दी गई है और अनुच्छेद 21 में दी गई जीने की स्वतंत्रता का इससे गहरा संबंध है। अनुच्छेद 19(2) में यह कहा गया है कि अनुच्छेद 19(1) के कानून का किसी तरह का विपरीत प्रभाव नहीं डाल सकता।

हर व्यक्ति को सम्मान से जीने का अधिकार अनुच्छेद 21 देता है। सच भी यही है कि बोलने की स्वतंत्रता के माध्यम से अगर किसी के लिए अपमानजनक बात कही जाए या निन्दा की जाए, तो उसका प्रभाव व्यक्ति के सामाजिक अस्तित्व पर सीधे-सीधे पड़ता है।

न्यायालय ने भी इस बात को स्पष्ट किया है कि किसी की बोलने की स्वतंत्रता से दूसरे की ख्याति पर चोट नहीं पहुंचाई जा सकती। किसी की नकारात्मक या अपमानजनक सच्चाई अगर समाज से जुड़ी न होकर व्यक्तिगत है, तो उसे उजागर होने से बचा जाना चाहिए।

सामाजिक भलाई के लिए किसी की की गई निंदा या सच्चाई को अपमान के लिए बने सिविल कानून में सुरक्षा दी गई है, और इसे इंडियन पीनल कोड के अनुच्छेद 499 की धारा 2, 3, 5, 6 और 9 में भी रखा गया है। वाणी द्वारा किसी का अपमान एक अपराध है, और इस कानून को अधिक सशक्त बनाने की जरूरत है।

मानवाधिकारों का उल्लंघन

मानव अधिकार विभिन्न कानूनों द्वारा संरक्षित हैं, लेकिन अभी भी लोगों, समूहों और कभी-कभी सरकार द्वारा इसका उल्लंघन किया जाता है. मानव अधिकारों के दुरुपयोग की निगरानी के लिए कई संस्थान बनाए गए हैं. जहां सरकारें और कुछ गैर-सरकारी संगठन भी इनकी जांच करते हैं.

इंसानी अधिकारों को पहचान देने और उसके हक की लड़ाई को ताकत देने के लिए हर साल 10 दिसंबर को अंतरराष्‍ट्रीय मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है. पूरी दुनिया में मानवता के खिलाफ हो रहे जुल्मों रोकने और उसके खिलाफ आवाज उठाने में इस दिवस की महत्वूपूर्ण भूमिका है.

‘अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ (Human Rights Day) हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने 1950 में दस दिसंबर (10 December) के दिन को मानवाधिकार दिवस (World Human Rights Day) घोषित किया था जिसका उद्देश्य विश्वभर के लोगों का ध्यान मानवाधिकारों की ओर आकर्षित करना था. साल 1948 में यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली ने इसको अपनाया लेकिन आधिकारिक तौर पर इस दिन की घोषणा साल 1950 में हुई. ‘अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ (International Human Rights Day) मनाने के लिए असेंबली ने सभी देशों को 1950 में आमंत्रित किया. जिसके बाद असेंबली ने 423 (V) रेज़्योलुशन पास कर सभी देशों और संबंधित संगठनों को इस दिन को मनाने की सूचना जारी की थी.

मानवाधिकार दिवस क्यों मनाया जाता है?
मानवाधिकार दिवस (Human Rights Day) लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है. मानवाधिकार में स्वास्थ्य, आर्थिक सामाजिक, और शिक्षा का अधिकार भी शामिल है. मानवाधिकार वे मूलभूत नैसर्गिक अधिकार हैं जिनसे मनुष्य को नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, धर्म, लिंग आदि के आधार पर वंचित या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता.

भारत में मानवाधिकार
भारत में मानवाधिकार कानून 28 सितंबर 1993 में अमल में आया. जिसके बाद सरकार ने 12 अक्टूबर 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया. मानवाधिकार आयोग राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्षेत्रों में भी काम करता है. जैसे मज़दूरी, HIV एड्स, हेल्थ, बाल विवाह, महिला अधिकार. मानवाधिकार आयोग का काम ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करना है.

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन निर्वाह करने का अधिकार है। विश्व मानवाधिकार दिवस  पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा है कि स्वतंत्रता और समानता, मानवाधिकार के दो महत्वपूर्ण विषय है।

हमारे संविधान में भी देश के नागरिकों को जीवन की सुरक्षा के साथ ही समानता व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व के वर्तमान परिदृश्य में मानव अधिकारों के प्रति जागरूक रहना आज और भी प्रासंगिक हो गया है।

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Post source : Agency

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