भारत में होली का त्योहार रंग-गुलाल के बिना अधूरा

भारत में होली का त्योहार रंग-गुलाल के बिना अधूरा

यह पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द का संदेश देता है। जबकि दुनियाभर में रंग आनंद, एकता और उत्साह का भी प्रतीक है। रंगों से उत्सव और जश्न मानने की परंपरा भारत के साथ दुनिया के कई देशों तक फैल चुकी है। यही वजह है कि दुनिया भर में रंगों से जुड़े कई अनोखे उत्सव मनाए जाते हैं जो संस्कृति, परंपरा और उत्साह का शानदार मेल हैं।

 

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अपनी परंपराओं के अनुसार वहां के निवासी रंगों से त्योहार का जश्न मनाते है। परंपरा और त्योहार भले अलग हैं लेकिन जश्न का तरीका होली जैसा ही है। थाईलैंड, लंदन समेत दुनिया के 40 से अधिक देशों में भी रंगों का इस्तेमाल होता है। होली पर न सिर्फ रंग उड़ता है और लगाया जाता है बल्कि परंपरा को भी सहेजा जाता है। भारत में होली का जश्न जिस तरह रंग से है, दूसरे देशों में भी रंग से त्योहार का उल्लास रहता है। इन सभी उत्सवों का मकसद धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक स्मृति, खेल या सिर्फ मनोरंजन जैसे अलग-अलग हो सकता है लेकिन खुशी, मेलजोल और सामूहिक उत्साह सभी जगह समान है। संवाद

थाईलैंड में नववर्ष के मौके पर मनाया जाने वाला सोंगक्रान त्योहार भारत की होली की तरह मनाया जाता है। वहां लोग रंगों से खेलकर इसका जश्न मनाते हैं। इसे वाटर फेस्टिवल भी कहते हैं। भारत की तरह लोग एक-दूसरे पर रंगों का पानी डालते हैं। लोग पानी की बंदूकें और बाल्टियां लेकर जश्न मनाते हैं।

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