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June 27, 2019

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7 लाख करोड़ के टेक्सटाईल बाजार पर विदेशी ब्राण्ड्स का कब्जाः स्वामी रामदेव महाराज

7 लाख करोड़ के टेक्सटाईल बाजार पर विदेशी ब्राण्ड्स का कब्जाः स्वामी रामदेव महाराज
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हरिद्वार:  5 जनवरी 1995 को स्वामी रामदेव  महाराज व  आचार्य बालकृष्ण महाराज ने जनसेवा व राष्ट्रसेवा के उद्देश्य से संस्था की स्थापना की थी। सेवा का यह नन्हा सा पौधा आज वट-वृक्ष का रूप ले चुका है, जिसकी अनेक शाखाएँ पतंजलि की विभिनन्न इकाईयों के रूप में देश-विदेश में गतिमान हैं। संस्था के 24वें स्थापना दिवस पर पतंजलि योगपीठ परिवार ने ‘पतंजलि परिधान’ स्टोर के रूप में एक कदम आगे बढ़ाया है, जिसका उद्घाटन पतंजलि योगपीठ स्थित आयुर्वेद भवन में स्वामी रामदेव महाराज तथा आचार्य बालकृष्ण महाराज के हाथों हुआ।

इस अवसर पर स्वामी रामदेव महाराज ने कहा कि पतंजलि परिवार के साधना, सेवा व संघर्ष, योग व कर्मयोग और मानव सेवा से राष्ट्रसेवा के 24 वर्ष पूर्ण हुए हैं। 24 वर्षों की इस सतत साधना एवं सेवा को आगे बढ़ाते हुए आने वाले 50 वर्षों के लिए हम तैयार हैं। 2050 तक भारत को विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक, आध्यात्मिक महाशक्ति बनाने के लिए हम कृतसंकल्पित हैं। इसके लिए व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की एक बहुत बड़ी भूमिका पतंजलि की रही है और उसे आगे ले जाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। अब तक की यात्रा से जहाँ करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य मिला, उन्हें रोगमुक्त, तनावमुक्त, व्यसनमुक्त व्यक्ति बना करके उन्हें एक दिव्य आध्यात्मिक जीवन जीने की पद्धति पतंजलि ने सिखाई, इसमें लाखों कार्यकताओं और करोड़ों समर्थकों ने हमें ताकत देकर यहाँ तक पहुँचाया है। विश्व का सबसे बड़ा योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा व अनुसंधान का केन्द्र पतंजलि ने बनाया। विश्व के नये कीर्तिमान हरिद्वार की इस पावन धरा से बने।

इस पतंजलि परिधान स्टोर का शुभारम्भ हम हरिद्वार की पावन भूमि से करने जा रहे हैं। लगभग 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बाजार टेक्सटाईल सेक्टर का है, जिसमें से 90 प्रतिशत से ज्यादा अन-आर्गेनाइज्ड सेक्टर में हैं। आर्गेनाइज्ड सेक्टर में जो ब्राण्डेड कपड़े मिलते भी हैं, उन पर विदेशी कम्पनियों का कब्जा है। विदेशी ब्राण्ड ने भारत में अपने पैर ऐसे पसारे की स्वदेशी ब्राण्ड का खड़ा होना ही बहुत मुश्किल था। हमने पतंजलि परिधान को एक सशक्त स्वदेशी विकल्प के तौर पर देश को समर्पित किया है। स्वामी जी ने कहा कि आज टेक्सटाइल इण्डस्ट्री दम तौड़ रही है, बुनकरों के पास काम नहीं है।

इस पूरे अभियान में हमारा संकल्प है कि बुनकरों के हाथों को काम मिले, उनको उनकी मेहनत का पूरा दाम मिले। उनको सम्मान व स्वाभिमान के साथ जीने का हक मिले। इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण महाराज ने कहा कि भारतवर्ष एक सांस्कृतिक विरासत का देश है, हमारे कपड़ों और पहनावे का एक समृद्ध इतिहास है जो विविधता में एकता को दर्शाता है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक प्रत्येक राज्य का एक अनूठा पहनावा है। उन्होंने कहा कि हमें भारत के शिल्पकारों तथा बुनकरों पर गर्व है, जो इतनी कुशलता से सामान्य से दिखने वाले कपड़े पर अपनी कलाकारी, कढ़ाई, बुनाई और छपाई की तकनीकों से एक अनूठा रूप देने में सक्षम हैं।

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