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वित्त मंत्री: राज्यों को दिया जाएगा 20,000 करोड़ रुपये का कम्पेनसेशन सेस

वित्त मंत्री: राज्यों को दिया जाएगा 20,000 करोड़ रुपये का कम्पेनसेशन सेस
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि क्षतिपूर्ति उपकर से प्राप्त 20,000 करोड़ रुपये का वितरण राज्यों के बीच किया जाएगा। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने परिषद ने इसरो और एंट्रिक्स की उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं को माल एवं सेवा कर दायरे से छूट देने का भी निर्णय किया।




वित्त मंत्री सीतारमण ने बैठक के बाद कहा, ”क्षतिपूर्ति उपकर से प्राप्त 20,000 करोड़ रुपये का वितरण राज्यों के बीच किया जाएगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी परिषद ने जून 2022 के बाद भी क्षतिपूर्ति उपकर जारी रखने का निर्णय किया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद की माल एवं सेवा कर उपकर संग्रह में कमी तथा राज्यों की क्षतिपूर्ति पर आगे और विचार-विमर्श के लिये 12 अक्टूबर को बैठक होगी। परिषद की बैठक के बाद वित्त सचिव अजय भूषण पांडे ने कहा कि जीएसटी परिषद ने इसरो और एंट्रिक्स की उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं को माल एवं सेवा कर दायरे से छूट देने का निर्णय किया है।

गुड्स एंड सर्विस टैक्‍स काउंसिल (GST Council) की बैठक में वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने राज्‍यों के हित में एक बड़ा फैसला लिया. निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस साल 20,000 करोड़ रुपये का जीएसटी कॉम्‍पनशेसन सेस (GST Compensation Cess) जमा किया गया है. इसे आज देर रात (Tonight) को ही राज्यों के लिए जारी कर दिया जाएगा. साथ ही उन्‍होंने कहा, ‘जीएसटी काउंसिल ने फैसला किया है कि जून, 2022 के बाद क्षतिपूर्ति सेस को आगे बढ़ाया जाएगा.’



12 अक्‍टूबर तक टला मुआवजे की रकम पर फैसला
जीएसटी काउंसिल की 42वीं बैठक में सोमवार को भी मुआवजे की रकम (Compensation Amount) पर केंद्र सरकार (Central Government) और राज्यों (States) के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई. काउंसिल की अगली बैठक 12 अक्टूबर को होगी. केरल के वित्‍त मंत्री थॉमस इसाक ने कहा, 10 राज्य शर्तों के मुताबिक मौजूदा साल में केंद्र सरकार की ओर से पूरी रकम देने की मांग कर रहे हैं. इसके लिए केंद्र सरकार को लोन (Loan) लेना चाहिए. अब इस पूरे मामले पर 12 अक्टूबर को ही चर्चा के बाद फैसला होने की उम्‍मीद है.

जीएसटी कलेक्शन में 2.35 लाख करोड़ की है कमी’
रेवेन्यू सेक्रेटरी अजय भूषण पांडे ने कहा कि अभी जीएसटी कलेक्शन में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी है. इनमें से 97,000 करोड़ रुपये जीएसटी का बकाया है, जबकि बाकी कोरोना वायरस की वजह से बाकी है. अगस्त 2020 में हुई काउंसिल की बैठक में केंद्र ने जीएसटी की भरपाई के लिए दो विकल्प सुझाए थे. एक, राज्यों को एक स्पेशल विंडो मुहैया कराई जाएगी, जिसके तहत वे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) से लोन ले सकते हैं. इसमें कम ब्याज दर पर राज्यों को 97,000 करोड़ रुपये का कर्ज मिल सकता है. इस रकम को 2022 तक सेस कलेक्शन से जमा किया जा सकता है.



कई राज्‍यों ने केंद्र के कर्ज विकल्‍प से किया इनकार
केंद्र सरकार ने दूसरे के विकल्प के तौर पर कहा था कि स्पेशल विंडो के तहत पूरा 2.35 लाख करोड़ रुपये लोन लिया जा सकता है. इस मुद्दे पर देश के 21 राज्य केंद्र का समर्थन कर रहे हैं. उनके पास सितंबर के मध्‍य तक विकल्प चुनकर 97,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का मौका था. हालांकि पश्चिम बंगाल, पंजाब और केरल ने इस विकल्‍प को मानने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि केंद्र सरकार लोन लेकर उन्हें जीएसटी मुआवजे की भरपाई करे. अभी तक आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पुड्डुचेरी, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड और यूपी ने कर्ज का विकल्प चुन लिया है.



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