
नियामक आयोग ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए उद्योगों की बिजली के दाम तो नहीं बढ़ाए, लेकिन श्रेणी में बदलाव करके उद्योगों को अधिकतम खपत के लिए प्रोत्साहित जरूर किया है। मकसद ये है कि उद्योग 50 प्रतिशत से अधिक बिजली की खपत करें और सस्ती दरों पर भुगतान करें।
इस वर्ष जो भी उद्योग ज्यादा बिजली खर्च करेंगे, उन्हें बिजली दरों में छूट मिलेगी। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि पहले लोड फैक्टर की श्रेणी 40 प्रतिशत की थी। 40 प्रतिशत लोड फैक्टर पर बिजली दरें 6.45 रुपये और इससे ऊपर 6.85 रुपये थी।
अब यह श्रेणी बदलकर 50 प्रतिशत कर दी गई है। यानी 50 प्रतिशत तक लोड फैक्टर पर बिजलीदर 6.85 रुपये और इससे अधिक पर 6.60 रुपये होंगी। इससे उद्योग अधिकतम बिजली खर्च को प्रोत्साहित होंगे। उधर, नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोतों से पूरी बिजली का लाभ उठाने वालों के लिए आयोग ने 39 पैसे प्रति यूनिट का ग्रीन टैरिफ अनुमोदित किया है। यह मानक टैरिफ से अलग देना होगा।
आयोग ने विद्युत मंत्रालय के उपभोक्ता अधिकार नियमों के तहत 25 किलोवाट से अधिक भार वाले औद्योगिक उपभोक्ताओं (एलटी व एचटी) को बड़ी राहत दी है। सौर ऊर्जा अवधि के दौरान सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे के बीच इन्हें बिजली खपत में 22.5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। मकसद ये है कि उद्योगों का पीक आवर में यूपीसीएल पर कम बोझ रहे, जिससे बाजार पर निर्भरता भी कम हो।
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