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Naseeruddin Shah: मुंबई यूनिवर्सिटी के एक इवेंट में नसीरुद्दीन शाह को पहले आमंत्रित किया गया. लेकिन किसी वजह से उन्हें बाद में नहीं बुलाया गया. इस बात से नसीरुद्दीन शाह इतना नाराज हो गए कि उन्होंने एक अंग्रेजी अखबार में इस पर पूरा एक लेख लिख दिया. आपको लग रहा होगा कि उन्होंने इस लेख में सिर्फ यूनिवर्सिटी के खिलाफ लिखा होगा. सरकार के खिलाफ लिखा होगा. सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ लिखा होगा. जैसा कि वो अकसर बोला भी करते हैं. लेकिन आप ये जानकर चौंक जाएंगे कि नसीरुद्दीन शाह ने इस बार हदें पार कर दी हैं. इस बार उन्होंने पूरे देश पर ही सवाल खड़ा कर दिया है.
‘ये वो देश नहीं है जहां मैं बड़ा..’
उन्होंने अपने लेख में लिख दिया. ये वो देश नहीं है जहां मैं बड़ा हुआ, जहां प्यार करना सिखाया जाता था. यहां ‘विचारों की पुलिस’ और ‘दो तरह की बातें बोलने वाले’ लोगों को पूरी ताकत के साथ निगरानी रखने के लिए तैनात कर दिया गया है. नसीरुद्दीन शाह को जिस देश के दर्शकों ने 4 दशकों से पसंद किया है. उनकी फिल्मों की सराहना की है, अचानक ही ये देश उन्हें बदला-बदला लग रहा है. हमेशा कैमरों से घिरे रहने वाले नसीर साहब को आज लगने लगा है कि वो विचारों की पुलिस की नजरों से घिरे हुए हैं.
नसीरुद्दीन शाह मौजूदा सरकार के आलोचक रहे
ये सभी जानते हैं कि नसीरुद्दीन शाह मौजूदा सरकार के आलोचक रहे हैं. वो खुलकर अपनी बातें सामने रखते हैं. उनका काफी विरोध भी होता है. लेकिन एक वर्ग उनके साथ खड़ा भी रहता है. सत्ताधारी पार्टी की तारीफ और आलोचना तक ठीक था. लेकिन आज उन्होंने देश पर ही सवाल खड़ा कर दिया है. क्या सरकार की आलोचना करते करते नसीरुद्दीन शाह के दिल में इतनी कुंठा, इतनी नफरत बढ़ गई है कि उन्हें अब इस देश में कहीं भी प्यार नजर नहीं आता. उन्हें चारो तरफ अब नफरत ही दिखाई दे रही है.
आपने एक कहावत सुनी होगी कि नकारात्मकता उन लोगों पर असर डालती है जो उस फ्रिक्वेंसी पर होते हैं. जाहिर सी बात है जो प्यार बांटते हैं. उन्हें आज भी हमारा भारत प्यारा लगता है. लेकिन नसीर साहब की नजरें न जाने कहां देख रही हैं कि उन्हें बीते कुछ सालों से सिर्फ नफरत और नकारात्मता ही दिखाई दे रही है. उनके कुछ पुराने बयान ही उठाकर देख लीजिए.
‘बच्चे भीड़ का शिकार न हो जाएं’
वहीं नसीर साहब ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें इस बात का डर लगने लगा है कि कहीं उनके बच्चे भीड़ का शिकार न हो जाएं. सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म द केरल स्टोरी की सफलता इन्हें एक खतरनाक ट्रेंड लगती है. नसीरुद्दीन शाह का मानना है कि मुगलों ने इस देश को लूटा नहीं.. बल्कि बहुत कुछ दिया है. ये कहते हैं देश में पाकिस्तान की तारीफ करने को भारत विरोधी नहीं मानना चाहिए
4 दशकों से बॉलीवुड का हिस्सा
बता दें कि नसीरुद्दीन शाह 4 दशकों से बॉलीवुड का हिस्सा हैं. कई शानदार फिल्में बनाई हैं. लेकिन आज की तारीख में उन्हें लोग उनकी फिल्मों की वजह से नहीं याद कर रहे हैं. बल्कि वो अपनी कुंठित विचारधारा और विवादित बयानों की वजह से ज्यादा चर्चित रहते हैं. ऐसे में नसीरुद्दीन साहब को ये सोचना चाहिए कि कहीं उनकी ये संकीर्ण सोच नासूर न बन जाए.
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