भोगपुर में बन रहे ‘जापान के पारंपरिक वस्त्र’ | Doonited.India

July 18, 2019

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भोगपुर में बन रहे ‘जापान के पारंपरिक वस्त्र’

भोगपुर में बन रहे ‘जापान के पारंपरिक वस्त्र’
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जापान में वर्षों नौकरी करने के बाद राकेश सिंह जब भारत लौटे तो उनके पास उद्यमिता के क्षेत्र में सफल होने का मंत्र था। उन्होंने जापान के ऐसे वस्त्रों को यहां बनाना शुरू किया, जो कच्चा माल न होने के कारण वहां बनने बंद हो गये थे। राकेश और उनकी पत्नी सृष्टि ने कड़ी मेहनत की और आज उनका 100 फीसदी माल सीधे जापान एक्सपोर्ट होता है। मामूली पूंजी से शुरू किये गये काम का टर्नओवर आज तीन करोड़ रुपये सालाना है।

मूल रूप से पौड़ी के पयाल गांव(सबदरखाल) निवासी राकेश सिंह और उनकी पत्नी सृष्टि की फैक्ट्री ‘गैलरी गंगा मां की’ भोगपुर में है। आज के वक्त में उनकी फैक्ट्री में लगभग साठ स्थानीय कामगार काम कर रहे हैं। राकेश बताते हैं कि पढ़ाई करने के बाद उन्होंने होटल मैनेजमेंट किया और फिर नौकरी के लिये जापान चले गये थे। वहां पर पहले होटल इंडस्ट्री मे काम किया और फिर टैक्सटाइल स्टूडियो कंपनी में काम किया। इस दौरान उन्होंने एक बात नोटिस की कि जापान के पारंपरिक गर्म कपड़े, काफी कुछ उत्तराखंड से मिलते जुलते है। मसलन, सदरी, शॉल, स्कार्फ, लव्वा आदि। ये सभी कपड़े भेड़ों की ऊन से बनते थे, लेकिन जापान में मॉर्डनाइजेशन के बाद लोगों ने भेड़ पालन कम कर दिया था।

इसके बाद ऐसे गर्म वस्त्र बनने लगभग बंद से हो गए थे, लेकिन डिमांड फिर भी काफी थी। राकेश बताते हैं कि उनके दिमाग में आया कि हमारे उत्तराखंड में उत्तरकाशी के डुंडा में पर्याप्त मात्रा में ऊन मिल जाती है। ऐसे ही कई अन्य इलाके हैं, जहां पर ऊन मिल जाएगी। लिहाजा, उन्होंने भारत का रुख किया और यहां पर ऊन खरीदकर जापानी वस्त्र तैयार किये। राकेश बताते हैं कि उनकी फैक्ट्री में सभी वस्त्र हाथों से ही बनाये जाते हैं। उनका लगभग सौ फीसदी माल जापान जाता है। जिससे उनका टर्नओवर सालाना तीन करोड़ तक पहुंच चुका है। उनके यहां साठ कामगार काम करते हैं।

जापान के राजदूत थपथपा चुके हैं पीठ गत साल अक्टूबर में देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज में इनवेस्टमेंट समिट राज्य सरकार ने आयोजित की थी। जिसमें कई देशों के उद्यमी और प्रतिनिधि आये थे। जापान की तरफ से भारत में नियुक्त राजदूत भी इस समिट में आये थे और उन्होंने अपने संबोधन में राकेश सिंह की काफी प्रशंसा की थी। उसके बाद राजदूत ने राकेश सिंह के स्टॉल का भी रुख किया था ।

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Post source : agencies

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