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रिश्ते पुराने होते हैं, पर “मायका” पुराना नही होता। By अमृता प्रीतम

रिश्ते पुराने होते हैं,
पर “मायका” पुराना नही होता।
जब भी जाओ …..
अलाये-बलायें टल जाये,
यह दुआयें मांगी जाती हैं।
यहां-वहां बचपन के कतरे बिखरे होते हैं,
कहींहंसी,कहीं खुशी,कहीं आंसू सिमटे होते हैं।
बचपन का गिलास….
कटोरी ….,
खाने का स्वाद बढ़ा देते हैं।
अलबम की तस्वीरें,
कई किस्से याद दिला देते हैं।
सामान कितना भी समेटू,
कुछ ना कुछ छूट जाता है।
सब ध्यान से रख लेना
हिदायत पिता की ….
कैसे कहूं सामान तो नही
पर दिल का एक हिस्सा,
यहीं छूट जाता है।
आते वक्त माँ,
आँचल मेवों से भर देती हैं।
खुश रहना कह कर,
अपने आँचल मे भर लेती है।
आ जाती हूँ मुस्करा कर मैं भी,
कुछ ना कुछ छोड कर
अपना।
रिश्ते पुराने होते हैं,
जाने क्योँ मायका पुराना नही होता।
उस देहरी को छोडना,
हर बार ….
आसान नही होता।
– अमृता प्रीतम
 




 

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