
हेंवलघाटी की चिपको आंदोलन की एक नायिका बचनी देवी का सौ वर्ष की आयु में निधन हो गया। पैतृक घाट शिवपुरी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन पर चिपको आंदोलन व सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शोक संवेदना प्रकट की।
विकासखंड नरेंद्रनगर के अदवाणी गांव निवासी चिपको नेत्री बचनी देवी का शनिवार को देहरादून स्थित आवास पर निधन हो गया था। वहीं रविवार को उनके गांव के पैतृक घाट शिवपुरी में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
बताते चलें कि 1977 में हेंवलघाटी के अदवाणी क्षेत्र में जब सरकार की ओर से जंगलों के व्यापारिक कटान की अनुमति मिली, तो वहां कटान का विरोध कर रहे आंदोलन के शीर्ष नेता धूम सिंह नेगी, विजय जड़धारी, सुदेशा बहिन के साथ बचनी देवी भी खड़ी हो गई, खास बात यह है कि उस समय गांव के प्रधान उनके पति थे, जो जंगलों के ठेकेदार भी थे। लेकिन वह जंगलों को बचाने के लिए अपने पति व परिवार से विद्रोह कर गई।
उन्होंने कहा कि परिवार बाद में पहले जंगलों को बचाना है। उन्होंने आंदोलन में क्षेत्र की महिलाओं को भी संगठित करने का कार्य किया। कई दिनों तक परिवार का विरोध झेलते हुए भी वे आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करती रही।
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