
पंचायतीराज मंत्री बने मदन कौशिक के सामने छोटी सरकार (पंचायतों) को बड़े अधिकार दिलाने की चुनौती है। ताकि पंचायतों में विकास की रफ्तार को और गति दी जा सके।
त्रिवेंद्र सरकार में शहरी विकास मंत्री रहे मदन कौशिक को धामी सरकार में शहरों की जगह पंचायतों की जिम्मेदारी मिली है। हालांकि यह उम्मीद जताई जा रही थी कि उन्हें फिर से शहरी विकास की जिम्मेदारी मिल सकती है। पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी उन्हें ऐसे समय में मिली है जब विभाग में उनके सामने कई चुनौतियां हैं। पंचायतों के विकास के लिए कम समय में उन्हें इन चुनौतियों से निपटना होगा।
1- पंचायतों को 29 विषयों को सौंपने की चुनौती
देहरादून। राज्य गठन के 25 साल बाद भी पंचायतों को 73 वें संविधान संशोधन में मिले 29 विषयों (विभागों) को नहीं सौंपा जा सका है। यही वजह है पंचायतें आज भी वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्ता के लिए संघर्ष कर रही हैं। इन विभागों को पंचायतों को सौंपने के लिए पूर्व में सरकार की ओर से हाईपावर कमेटी का गठन किया गया था। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज संस्थान के तहत गठित कमेटी सरकार को अपनी सिफारिश सौंप चुकी है।
2- 850 ग्राम पंचायतों के पास नहीं है अपने पंचायत भवन
प्रदेश की 850 से ज्यादा पंचायतें ऐसी हैं, जिनके पास अपने पंचायत भवन नहीं है। पंचायतीराज मंत्री मदन कौशिक के सामने सभी पंचायतों में पंचायत भवन के निर्माण की चुनौती होगी।
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