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Prathyusha Death Case Update: सुप्रीम कोर्ट ने 24 साल पहले 20 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहे वाली तेलुगु एक्ट्रेस प्रत्युषा की मौत को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ कहा कि उनकी मौत गला दबाने से नहीं बल्कि, ऑर्गेनोफॉस्फेट जहर के असर से हुई थी. कोर्ट ने इस केस में आरोपी गुडिपल्ली सिद्धार्थ रेड्डी की सजा को बरकरार रखा. उन पर आईपीसी की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का दोष साबित हुआ था.
जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने सभी अपीलें खारिज कर दीं. कोर्ट ने ये भी कहा कि अस्पताल लाए जाने के समय प्रत्युषा होश में थीं. उन्होंने खुद डॉक्टरों को बताया था कि उन्होंने कीटनाशक (कीड़े मारने की दवा) पी लिया है. इसलिए गला घोटकर मारने का आरोप पूरी तरह गलत है. ये मामला आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के 28 दिसंबर, 2011 के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. हाई कोर्ट ने सजा घटाकर दो साल की थी और जुर्माना बढ़ाया था.
24 साल पहले मौत की वजह बताई गई थी गलत
विवाद की शुरुआत 25 फरवरी, 2002 की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुई थी. डॉ. बी. मुनी स्वामी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि मौत की वजह ‘गले पर दबाव और मैनुअल स्ट्रैंगुलेशन से दम घुटना’ है. हालांकि, उन्होंने जांच के लिए इंटरनल ऑर्गन सिक्योर रखे थे. इसी रिपोर्ट के आधार पर हत्या और यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे, जिनकी बाद में डिटेल में जांच हुई. आंध्र प्रदेश फॉरेंसिक साइंस लैब की जांच में एक्ट्रेस के शरीर और पेट के नमूनों में ऑर्गेनोफॉस्फेट जहर मिला.
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CBI जांच में खुले कई राज
इसके बाद राज्य सरकार ने तीन विशेषज्ञों की समिति बनाई. समिति ने साफ कहा कि मौत ‘ऑर्गेनोफॉस्फेट जहर’ से हुई है. उन्होंने ये भी बताया कि गला दबाने या यौन शोषण का कोई सबूत नहीं मिला. रिपोर्ट में पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर की राय पर सवाल उठाए गए. मामला बाद में CBI को सौंपा गया. जांच एजेंसी ने एम्स के डॉक्टरों से राय ली. 2 मई, 2002 को एम्स की टीम ने भी साफ कहा कि मौत ‘ऑर्गेनोफॉस्फोरस जहर’ से हुई है.

जहर खान ने हुई एक्ट्रेस की मौत
उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्ज गला दबाने की बात को गलत बताया. डॉक्टरों का कहना था कि इलाज के दौरान हुई चोटों को हिंसा समझ लिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने सभी मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्टों का मिलान किया. कोर्ट ने माना कि शुरुआती पोस्टमार्टम और बाद की साइंटिफिक रिपोर्टों में अंतर था. एम्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि ये ‘फैसले में हुई गलती’ थी. कोर्ट ने ये भी कहा कि यौन शोषण का कोई सबूत नहीं मिला.
4 साल में 12 फिल्मों में किया काम
आखिर में कोर्ट ने कहा कि इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट की एक जैसी राय से ये तय है कि मौत जहर से हुई. इसलिए हत्या का आरोप टिकता नहीं है. हालांकि, आत्महत्या के लिए उकसाने का दोष बरकरार रखा गया. अदालत ने आरोपी को चार हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया. सभी अपीलें खारिज करते हुए कोर्ट ने मामले को यहीं खत्म कर दिया. बता दें, प्रत्युषा साउथ सिनेमा की एक जानी-मानी एक्ट्रेस थी, जिन्होंने 4 साल में कुल 12 फिल्मों में काम किया था.
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