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Ghooskhor Pandat Controversy: मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा. फिल्म के विरोध में कई जगह लोग सड़कों पर उतर आए हैं और इसे बैन करने की मांग कर रहे हैं. अब ये पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है. कोर्ट में एक जनहित याचिका फिल्म की रिलीज पर स्टे लगाने की मांग के साथ दाखिल की गई है. इस याचिका में अपील की गई है कि ये मूवी जाति और धर्म के आधार पर रुढ़िवादी सोच को बढ़ावा देती है. इसके साथ ही ब्राह्मण समुदाय की गरिमा और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है.
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल PIL
ये याचिका सुप्रीम कोर्ट में वकील डॉ. विनोद कुमार तिवारी ने दाखिल की है. इस याचिका में कहा गया है कि इस मूवी में धार्मिक और जातिगत पहचान से जुड़े शब्द पंडत और घूसखोर को एक साथ जोड़ दिया गया है, जो कि एक विशेष समुदाय को टार्गेट किया गया है जो अपमानजनक है. ये याचिका अतुल मिश्रा ने वकील के द्वारा फाइल करवाई है. ये ब्रह्म समाज ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय संगठन सचिव हैं. इन्होंने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और फिल्म निर्माता नीरज पांडे को प्रतिवादी बनाया है.
याचिका में क्या कहा गया?
इस याचिका में कहा गया- ‘आर्टिकल 19 (1) (a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है. ये सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता, नैतिकता और भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में उचित प्रतिबंधों के अधीन है. इसके साथ ही इस याचिका में कहा गया है कि ये फिल्म संविधान के आर्टिकल 14, 19(2), 21, 25 और 51ए (ई) का उल्लंघन करती है.’
क्यों हो रहा ‘घूसखोर पंडत’ का विरोध?
मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का विरोध दो वजहों से हो रहा है. पहला फिल्म के टाइटल और दूसरा फिल्म में मनोज बाजपेयी का करप्ट दिखाया जाना. इस फिल्म को लेकर लखनऊ, आगरा, जयपुर से लेकर और कई जगहों पर जमकर विरोध हो रहा है. अब ये देखना होगा कि ये विरोध कब तक शांत होगा.
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