‘फैक्ट्री की तरह होने लगा है फिल्मों में काम…’ बॉलीवुड में 12 घंटे की शिफ्ट पर मचा बवाल, अब इस डायरेक्टर ने उठाए सवाल

‘फैक्ट्री की तरह होने लगा है फिल्मों में काम…’ बॉलीवुड में 12 घंटे की शिफ्ट पर मचा बवाल, अब इस डायरेक्टर ने उठाए सवाल

Film Industry Working Hours Controversy: फिल्म इंडस्ट्री में शूटिंग के दौरान 12 घंटे की शिफ्ट को लेकर इन दिनों काफी बहस छिड़ी हुई है. कोई इसे जरूरी बता रहा है तो कोई इसे गलत मान रहा है. इसी बीच हमेशा अपनी बात खुलकर रखने वाले फिल्म निर्माता और निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने आईएएनएस से बातचीत में इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जाहिर की. उनका कहना है कि लंबे काम के घंटे इंडस्ट्री की सबसे बड़ी परेशानियों में से एक बन चुके हैं.

विवेक रंजन अग्निहोत्री ने साफ कहा कि बॉलीवुड में 12 घंटे या उससे ज्यादा काम कराना बिल्कुल भी सही नहीं है. उनके मुताबिक फिल्म बनाना एक क्रिएटिव काम है, लेकिन इसे फैक्ट्री की तरह चलाया जा रहा है. लोग लगातार थकते जा रहे हैं और जब शरीर थक जाता है तो दिमाग भी साथ छोड़ देता है. ऐसे माहौल में किसी से बेहतरीन क्रिएटिव काम की उम्मीद करना गलत है. उन्होंने मेकअप और प्रोस्थेटिक्स से जुड़ी दिक्कतों पर भी बात की. 

विवेक रंजन ने 12 घंटे की शिफ्ट पर की बात 

विवेक रंजन ने कहा कि मेकअप, विग, मूंछ या दाढ़ी लगाकर लंबे समय तक काम करना बेहद मुश्किल होता है. 7-8 घंटे बाद मेकअप उतरने लगता है और प्रोस्थेटिक्स ढीले पड़ जाते हैं. इंसान फिजिकली और मेंटली टूटने लगता है. सुबह की एनर्जी अलग होती है और शाम तक हालात पूरी तरह बदल जाते हैं. डायरेक्शन का कहना है कि पैसे बचाने के चक्कर में कम खर्च में ज्यादा काम निकालने की कोशिश की जाती है. भारत में सुविधाओं की कमी के चलते लोग मजबूरी में ये सब सहन कर लेते हैं. 

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12 घंटे की शिफ्ट 14-15 घंटे में बदल जाती है

उन्होंने कहा कि उन्हें अपने राइट्स की पूरी जानकारी नहीं होती और इंडस्ट्री में कोई सख्त नियम भी लागू नहीं हैं. इसी वजह से 12 घंटे की शिफ्ट धीरे-धीरे 13 से 14 घंटे तक खिंच जाती है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी पेंटर से कहें कि वे 12 घंटे लगातार पेंटिंग करता रहे या किसी सिंगर से कहें कि वो बिना रुके गाता रहे, तो वो भी थक जाएगा. जब तक इंसान नशे में न हो, इतनी देर तक क्रिएटिव काम करना संभव नहीं है. मुंबई जैसे शहर में आने-जाने में ही एक-दो घंटे लग जाते हैं, जिससे कुल काम का समय 14 से 16 घंटे हो जाता है.

सिस्टम में बदलाव बेहद जरूरी है – डायरेक्टर

विवेक रंजन अग्निहोत्री का मानना है कि इस सिस्टम में बदलाव बेहद जरूरी है. उन्होंने अपना एक्पीरियंस शेयर करते हुए कहा कि एक लंबी शिफ्ट के बाद उनकी भी क्रिएटिविटी खत्म हो जाती है. दिमाग काम नहीं करता और इमोशनली थकान भी महसूस होती है. उन्होंने अपील की कि फिल्म इंडस्ट्री की यूनियन, संगठन और सभी लोग मिलकर बैठें और इस समस्या का कोई ठोस समाधान निकालें. बता दें, इन दिनों वे अपने कई प्रोजेक्ट्स को लेकर बिजी चल रहे हैं, जिसके बारे में उनके फैंस भी जानना चाहते हैं. 

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