मैं कम इंटरव्यू देती हूं लेकिन जब ZEE का इन्विटेशन आया… ‘रियल हीरोज’ इवेंट में करीना कपूर ने कही दिल की बात

मैं कम इंटरव्यू देती हूं लेकिन जब ZEE का इन्विटेशन आया… ‘रियल हीरोज’ इवेंट में करीना कपूर ने कही दिल की बात

Zee Real Heroes Award 2026: मुंबई में हस्तियां का तांता लगा हुआ है. ‘जी संवाद विद रियल हीरोज’ में कई सितारों के बाद बॉलीवुड की वो इकलौती हीरोइन पहुंचीं जो ‘हीरोइन’ फिल्म भी कर चुकी हैं. इस मौके पर करीना कपूर खान ने बॉलीवुड सफर से लेकर अपनी निजी जिंदगी को लेकर कई बातें बताईं.

Zee के इन्विटेशन पर बोलीं करीना…

‘हमारी कहानी तो चलती रहेगी होपफुली. आप सभी से फिल्मी सफर, फैमिली सभी पर बात करके अच्छा लगेगा. मैं भी बहुत कम इंटरव्यूज करती हूं. लेकिन जब मुझे ZEE से ये इन्विटेशन आया तो मैंने सोचा क्यों ना चला जाए…काफी वक्त हो गया है मीडिया से बात किए हुए. फैंस से बात करते हुए. ये बहुत ही अच्छा मौका है यहां पर आने का. कुछ विचार एक दूसरे के साथ शेयर किए जाएं. बहुत एक्साइटेड हूं और अच्छा लग रहा है यहां आकर.’

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आपकी लाइफ का रियल हीरो कौन है?
इसका जवाब देते हुए करीना कपूर खान ने कहा- ‘स्क्रीन पर तो आपके हीरोज लगातार चेंज होते रहते हैं. लेकिन, रियल लाइफ के दो हीरोज हैं जो मैं चाहूंगी कि मरते दम तक कभी चेंज ना हो. वो दो मेरे छोटे बच्चे हैं. वो मेरे सुपरहीरोज हैं. लोगों को लगता है कि पेरेंट्स बच्चों को सिखाते हैं. लेकिन मुझे लगता है कि बच्चे पेरेंट्स को सिखाते हैं कि सही रास्ता क्या है. वो बहुत मासूम होते हैं. उनमें कोई फिल्टर नहीं होता. वो दिल से सोचते हैं. तो मेले लिए तो वो दोनों मेरे सुपरहीरोज हैं.’

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क्या सीखा बच्चों से?
‘पहले तो मैं अपने पहले बेटे से मां बनना सीखी हूं. सभी महिलाओं का मां बनने का सपना होता है. लेकिन, सही में हमें पता नहीं होता है कि हमें क्या करना होता है. प्रेग्नेंसी से लेकर बर्थ तक और जब तक बच्चा हमारे हाथ में नहीं होता हमें नहीं पता होता कि करना क्या है. मेरा पहला बेटा 10 साल का हो गया है. इस दस साल की जर्नी ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है कि मुझे कैसे मजबूत होना है. कभी-कभी दिन में गुस्सा भी चढ़ता है. एक मीम्स वायरल हुआ था जिसमें मैं अपने बेटे को आंखें दिखा रही हूं. और उसमें लिखा है हर मां अपने बच्चे को ऐसे ही आंख दिखाती है. मेरी मॉम ने भी मुझे ऐसे ही आंख दिखाई थी बचपन में.तो मैंने उनसे ही सीखा है कि मुझे जेह के साथ आंखें दिखाना है. लेकिन,कोई फायदा तो होता नहीं है. वो वैसे ही नॉटी बिहेव करते हैं. मैंने अपने बच्चों से बहुत ही एक अहम चीज सीखी है वो है पेशेंस. बहुत कम लोगों में वो पेशेंस होता है और वो सिर्फ एक मां ही समझ सकती है. तो मेरे अंदर एक अलग लेवल का पेशेंस आ गया है.’

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