‘इक्कीस’ में धर्मेंद्र की कास्टिंग पर मेकर्स के बीच छिड़ गई थी बहस, खुद लिखे कई सीन और डायलॉग्स, जो बन गए यादगार

‘इक्कीस’ में धर्मेंद्र की कास्टिंग पर मेकर्स के बीच छिड़ गई थी बहस, खुद लिखे कई सीन और डायलॉग्स, जो बन गए यादगार

Dharmendra Last Film Ikkis: 2026 के पहले ही दिन रिलीज हुई ‘इक्कीस’ ने आते ही दर्शकों का ध्यान खींच लिया था. इसकी कहानी और स्टारकास्ट दोनों ही वजह से फिल्म चर्चा में रही. इस फिल्म में अगस्त्य नंदा ने सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल का किरदार निभाया है, जो परमवीर चक्र पाने वाले भारत के सबसे कम उम्र के सैनिक थे. वहीं दिग्गज दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र फिल्म में उनके पिता मदन लाल के रोल में नजर आए. 

ये उनकी आखिरी फिल्म है. इस फिल्म की रिलीज से करीब 1 महीने पहले उनका निधन हो गया था. हाल ही में फिल्म की राइटर पूजा लढ़ा सुरती और अरिजीत बिस्वास ने SCREEN से बातचीत में इस फिल्म से जुड़ी कई दिलचस्प बातें शेयर कीं. उन्होंने बताया कि फिल्म के कुछ बेहद इमोशनल और यादगार सीन धर्मेंद्र ने खुद सोचे थे. इन सीनों ने न सिर्फ कहानी को गहराई दी, बल्कि उनके किरदार को भी खास बना दिया. 

धर्मेंद्र आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ 
 
राइटर्स के मुताबिक, धर्मेंद्र सेट पर सिर्फ अभिनय नहीं कर रहे थे, बल्कि हर सीन को जी रहे थे और उसे बेहतर बनाने में पूरा योगदान दे रहे थे. फिल्म का एक सीन है, जिसमें मदन लाल पाकिस्तान में अपने घर के पास एक पेड़ देखकर अपने पिता को याद करते हैं. इस सीन के बारे में पूजा ने बताया कि ये पूरा आइडिया धर्मेंद्र का था. उन्होंने कहा, ‘जब हमने उन्हें कहानी सुनाई, तो उन्होंने बताया कि पंजाब में उनके पिता, जो स्कूल के हेडमास्टर थे, के पास एक नीम का पेड़ था’. 

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धर्मेंद्र ने खुद लिखे थे कुछ डायलॉग्स 

उन्होने आगे कहा, ‘उस पेड़ में उन्हें अपने पिता की आवाज सुनाई देती थी. जब लोकेशन स्काउटिंग में वैसा पेड़ मिला, तो वह बहुत खुश हो गए. उस सीन के डायलॉग्स भी उनके अपने शब्द थे’. एक और अहम सीन में एक पाकिस्तानी अफसर मदन लाल को गालियां देता है और जवाब में उनका किरदार उसे गले लगा लेता है. इस सीन को लेकर अरिजीत बिस्वास ने कहा, ‘ये भी पूरी तरह धरम जी का आइडिया था. श्रीराम ने मुझे फोन कर कहा कि धरम जी चाहते हैं कि उनका किरदार गुस्से का जवाब गले लगाकर दे’. 

धर्मेंद्र ने खुद सजेश किए थे कुछ सीन

उन्होंने कहा, ‘मुझे ये सोच कमाल की लगी. हमने सीन को थोड़ा विस्तार दिया, लेकिन नफरत को तोड़ने वाला वो आलिंगन पूरी तरह उनका था’. पूजा ने आगे बताया, ‘उनकी आवाज में उर्दू की मिठास और इंसानियत बेमिसाल थी. फिल्म के अंदरूनी स्तर पर उनकी कास्टिंग को लेकर थोड़ी चर्चा जरूर हुई थी. कुछ लोगों को लगा कि अब वह प्रासंगिक नहीं हैं. लेकिन श्रीराम को पूरा भरोसा था कि ये किरदार सिर्फ वही निभा सकते हैं. हम तीनों शुरू से उनके फैन रहे हैं’. 

धर्मेंद्र को खूब पसंद आई थी फिल्म की कहानी  

उन्होंने बताया, ‘उनका काम के प्रति जुनून और सेट पर हर छोटे शॉट के लिए मौजूद रहना, मैं कभी नहीं भूल सकती’. उन्होंने बातचीत खत्म करते हुए कहा, ‘उनके अंदर काम को लेकर जो जोश था, वो आजकल के कई यंग कलाकारों में भी नहीं दिखता. स्क्रिप्ट सुनने के बाद उन्होंने कहा था, ‘ये मैं हूं, इसे और कोई नहीं कर सकता’. वे इस फिल्म को लेकर बेहद खुश थे. उन्होंने ये भी कहा था कि अगर किसी वजह से वे ये रोल न कर पाएं, तब भी इस कहानी को जरूर बनाया जाना चाहिए, क्योंकि आज के समय में इसे कहना बहुत जरूरी है’.

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