May 18, 2022

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विंटेज और क्लासिक कार एवं बाइक रैली के साथ विरासत के दसवें दिन की शुरुआत

विंटेज और क्लासिक कार एवं बाइक रैली के साथ विरासत के दसवें दिन की शुरुआत

श्री अशोक कुमार, डीजीपी उत्तराखंड पुलिस ने विरासत के विंटेज और क्लासिक कार एवं बाइक रैली को झंडा दिखाकर रवाना किया, सानिया पाटनकर के शास्त्रीय गायन से खुश होकर खुब तालियां बजाई और प्रसन्न हुए विरासत के दर्शक, प्रवीण गोडखिंडी के बांसुरी के स्वर से विरासत में मैजूद लोेग नेहाल हो गए

विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल 2022 के दसवें दिन की शुरुआत डॉ. बी. आर. अंबेडकर स्टेडियम (कौलागढ़ रोड) देहरादून में विंटेज और क्लासिक कार एवं बाइक रैली के साथ हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री अशोक कुमार, डीजीपी उत्तराखंड पुलिस ने विंटेज और क्लासिक कार एवं बाइक रैली को झंडा दिखाकर रवाना किया। वही देहरादून के जाने माने लोगो में रविंदर सिंह, डॉ. एस. फारूक और विजय अग्रवाल ने कार्यक्रम में शिरकत की।

विंटेज और क्लासिक कार एवं बाइक रैली में श्री रविंदर सिंह ने वेस्पा और लैंब्रेटा के मॉडलों सहित ग्यारह स्कूटरों का प्रदर्शन किया, कुणाल अरोड़ा एक जावा ट्विन लाए, नूर मोहम्मद ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय के बीएसए प्रदर्शित किया, जबकि डॉ फारूक छह कारों (शेवरले, विलीज, निसान जोंगा, स्टैंडर्ड, फोर्ड और ऑस्टिन)का प्रदर्शन किया। विंटेज और क्लासिक कार एवं बाइक रैली में सबसे पुराना मॉडल “शेवरलेट“ था, जो 1926 में डॉ. एस. फारूक द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह रैली डॉ. बी. आर. अंबेडकर स्टेडियम, कौलागढ़ रोड से होते हुए गढ़ी कैंट, पैसिफिक हिल्स, दिलाराम चौक, घंटाघर से होते हुए वापस बी. आर. अंबेडकर स्टेडियम, कौलागढ़ रोड पहुंचा।

सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ एवं सानिया पाटनकर के शास्त्रीय गायन ने विरासत के शाम को रंगीन बना दिया। सानिया पाटनकर के गायन से खुश होकर दर्शको ने खुब तालियां बजाई और प्रसन्न हुए। सानिया पाटनकर ने हाल ही में अपना एक एल्बम “रसिया“ रिलिज किया है जो उन्होंने भारत रत्न लता मंगेशकर जी को समर्पित किया है। कार्यक्रम मे उन्होंने राग खंबावती से कार्यक्रम की शुरुआत की जिसमें उन्होंने दो बंदिश और एक सरगम गीत प्रस्तुत किया , बाद में उन्होंने अर्ध शास्त्रीय शैली में एक टप्पा / होरी कि प्रस्तुति किया। उनके साथ तबले पर मिथिलेश झा जी, हारमोनियम पर जाकिर धौलपुरी जी और तानपुरा पर योगेश जी ने साथ दिया।

बताते चले कि संगीत प्रेमियों के परिवार में जन्मी सानिया की प्रतिभा को उनके माता-पिता ने 3 साल की छोटी उम्र में ही खोज लिया था, जब उन्होंने खुद हारमोनियम पर गाने बजाना शुरू किया था। बचपन से ही उन्हें स्वर और लय कि अच्छी समझ थी। उनके पिता एक वायलिन वादक हैं, माँ एक संगीत प्रेमी हैं और भाई समीप कुलकर्णी सितार वादक उस्ताद शाहिद परवेज के शिष्य हैं।

सानिया को 6 साल की उम्र में गणसरस्वती किशोरीताई अमोनकर से आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ और उन्होंने श्रीमती लीलताई घरपुरे से शास्त्रीय संगीत सीखना शुरू किया जो श्रीमती हीराबाई बडोडेकर की वरिष्ठ शिष्या थी। सानिया अपनी पहले गायन की शुरुआत 12 साल की उम्र में महान पंडित जितेंद्र अभिषेकी के सामने प्रस्तुती से कि थी और उस समय उन्होंने दर्शकों पर लंबे समय तक प्रभाव डाला। सानिया को प्रसिद्ध वरिष्ठ गायक डॉ अश्विनी भिड़े-देशपांडे के कुशल मार्गदर्शन में सीखने का सौभाग्य मिला है।  “संगीत विशारद“ में उन्होंने एम.कॉम किया है और वे स्वर्ण पदक विजेता हैं। इसके अलावा उन्होंने कंपनी सेक्रेटरी कोर्स भी पूरा किया, उनकी कड़ी मेहनत, लगन और संगीत के प्रति प्रेम ने संगीत और अकादमिक दोनों क्षेत्रों में उन्हें खुद को साबित करने में योगदान दिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के अन्य प्रस्तुतियों में प्रवीण गोडखिंडी द्वारा बांसुरी वादन प्रस्तुत किया गया। प्रवीण गोडखिंडी के बांसुरी के स्वर से विरासत में मैजूद लोेग नेहाल हो गए। उनकी पहला प्रस्तुति राग भूपाली फिर रूपक और तीन ताल है एवं जुगलबंदी सवार संवाद के रूप में रहा। बांसुरी पर प्रवीण जी के साथ उनके बेटे शादाज गोडखिंडी एवं तबला पर शुभ महराज ने साथ दिया।

प्रवीण गोडखिंडी बांसुरी बजाने की तांत्रिकी और गायकी शैली दोनों में महारत हासिल की है, वे आकाशवाणी में हिंदुस्तानी बंसुरी वादन के कलाकारो में सर्वोच्च स्तर पर है। उन्होंने पंडित वेंकटेश गोडखिंडी और विदवान अनूर अनंत कृष्ण शर्मा से प्रशिक्षण लिया। वे पेशे से एक इंजीनियर हैं लेकिन संगीत हमेशा उनका जुनून रहा है और यही वह बचपन से मानते हैं। भारत में उनके नाम कई उपलब्धियां है जिसमें वे 8 फीट कॉन्ट्राबास बांसुरी पर प्रदर्शन करने वाले पहले भारतीय बांसुरी वादक हैं। वे मेंडोज़ा अर्जेंटीना में आयोजित विश्व बांसुरी उत्सव में बांसुरी का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले भारतीय हैं। उन्हें सुरमणि, नाद-निधि, सुर सम्राट, कलाप्रवीना आदि बांसुरी बजाने में उनकी दक्षता के लिए कई उपाधियों से सम्मानित किया गया है एवं उन्होंने दुनिया भर के कई प्रसिद्ध संगीतकारों के साथ प्रस्तुतियां दी है।

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