August 10, 2022

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उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत ‘ऐपण’ कला

उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत ‘ऐपण’ कला

 

ऐपण पहाड़ की वो कला है, जिसे देखते ही उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत सामने आ जाती है. पहाड़ की ऐपण कला से रंगी साड़ी बनाने का अभिनव प्रयोग प्रशासन ने किया है. साड़ी पर पहाड़ी काला का यह प्रयोग सफल रहा तो यह कला देश-विदेश में तो खुद को स्थापित करेगी ही, साथ रोजगार के नए दरवाजे भी खोलेगी.

 

 

 

ऐपण आर्ट वैसे तो पहाड़ों में हर शुभ कार्य में बनाए जाते हैं, मगर बीते कुछ सालों में इस पारम्परिक कला से रंगे कई आइटम भी तैयार किए गए हैं. हालांकि यह पहली बार हुआ है कि ऐपण कला से रंगी कोई साड़ी तैयार हुई हो.

 

 

 

 

पिथौरागढ़ प्रशासन ने हिलांस के साथ मिलकर एक ऐसी साड़ी लॉन्च की है, जो पूरी तरह ऐपण में रंगी है. इस बारे में डीएम आशीष चौहान का कहना है कि बड़े स्तर पर ऐपण की साड़ी बाजार में उतारने के लिए प्लान तैयार किया जा रहा है. ऐसा होने पर कइयों को रोजगार मिल सकेगा.

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जिला प्रशासन ने ऐपण की साड़ी बनाने का काम महिला समूहों को दिया था. हाथ से तैयार होने के कारण ऐपण की साड़ी की कीमत तो ज्यादा है ही, साथ ही इसे बनाने में वक्त भी काफी लगा है.

 

 

 

 

अब हिलांस इसे टैक्सटाइल की दुनिया में स्थापित करने का प्लान बना रहा है. अगर ये प्लान हकीकत में तब्दील होता है तो देश और दुनिया में फैली पहाड़ी महिलाओं को खुद की ऐपण कला में बनी साड़ी आसानी से मिल सकेंगी.

 

 

ऐपण की साड़ी बनाने वाली दीपिका का कहना है कि प्रयोग के तौर पहली बार ऐपण की साड़ी तैयार की गई है. भविष्य में इस क्षेत्र में विविधता लाने का प्रयास जारी है. बीते कुछ सालों में ऐपण कला को कई महिलाओं ने रोजगार का जरिए बनाया है, लेकिन ये रोजगार छोटे स्तर पर ही सिमटता दिखाई दिया है.

 

 

 

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ऐसे में अगर ऐपण की साड़ी हर पहाड़ी के घर तक अपनी पहुंच बना पाई तो तय है कि काफी कुछ पहाड़ को नया भी मिलेगा.

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