May 17, 2022

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रथी मेले का धूम-धाम से किया गया आयोजन

रथी मेले का धूम-धाम से किया गया आयोजन

नई टिहरी: थौलधार विकासखंड क्षेत्रांतर्गत ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर अलेरू गांव के पास किल्याखाल में स्थित धनसिंह रथी देवता मंदिर में 7 गते बैशाख को लगने वाला विशाल मेला आज दो वर्षों के कोविड प्रतिबंधों के बाद धूम-धाम से श्रृद्धा के साथ मनाया गया।


   

2020 में लॉकडाउन और 2021 में कोबिड प्रतिबन्धों के कारण मेले का आयोजन नहीं हो पाया था। लेकिन इस वर्षे बड़ी संख्या में ध्याणियां एवं श्रृद्धालु मेले में पहुंचे। धन सिंह रथी देवता ध्याणियों (मायके पक्ष की बेटियां) के देवता नाम से प्रसिद्ध है। मान्यता है कि संकट आने पर श्री रथी देवता भक्तजनों के कष्टों को दूर कर देते हैं। यही कारण है कि क्षेत्र की बेटियां शादी के बाद अवश्य ही मंदिर में मत्था टेककर देवता का आशीर्वाद लेना नहीं भूलती हैं।


7 गते बैशाख को मंदिर में लगने वाले मेले में पहले क्षेत्र की बेटियां और उनके परिवारी जन ही आते थे। लेकिन धीरे-धीरे देवता के प्रति आस्था बढ़ने पर क्षेत्र के कुटुंब परिवार के साथ-साथ रिश्तेदार, मित्रजनों का बड़ी तादाद में मंदिर स्थल पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।

मंदिर के प्रति आस्था बढ़ने लगी तो 1995 में अलेरू गांव के ग्रामीणों ने मंदिर समिति का गठन किया। समिति की देखरेख में श्रृद्धालुओं के सहयोग से कुछ वर्षों पूर्व छोटे मंदिर की जगह विशाल मंदिर,स्वागत द्वार का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। ग्रामीण बताते हैं कि धन सिंह का जन 1887 को साधारण परिवार में हुआ, जो अपने जीवन यापन के लिए पशुपालन करते थे। एक समय ऐसा आया जब उनके गांव में हैजा जैसी घातक बीमारी फैल गयी।

गांव के कई लोगों की हैजा की चपेट में आने से मौत हो चुकी थी। 1918 को धन सिंह अधिकारी भी हैजाग्रस्त हो गए और उनकी मृत्यु हो गयी। उस समय हैजा से मृत्यु होने पर इंसान को जलाने की जगह दफन किया जाता था। युवा काल में हैजा से मौत के बाद धनसिंह की आत्मा क्षेत्र में कई लोगों पर अवतरित होने लगी एवं अपने भक्तों की समस्याएं दूर करने लगी। धीरे-धीरे क्षेत्र में स्व. धन सिंह अधिकारी ईष्ट देव रत्थी देवता के रूप में पूजे जाने लगा।

7 गते बैशाख 1941 को धन सिंह देवता की एक ध्याणी ने मनोकामना पूरी होने पर गांव में एक छोटा सा मंदिर बनाया। इसके बाद धीरे-धीरे भक्तों की आस्था बढ़ने पर मंदिर अब विशाल रूप ले चुका है। तब से 7 गते बैशाख को मंदिर में मेले की परम्परा चली आ रही है। मेले का स्वरूप प्रतिवर्ष बढ़ता जा रहा है किन्तु मेला आयोजन के लिए मैदान नहीं होने से मेला राष्ट्रीय राजमार्ग में ही लगता है।

श्री रथी देवता मंदिर सेवा समिति के अषाढ़ सिंह अधिकारी, पृथ्वी सिंह अधिकारी, दीपक सिंह अधिकारी आदि का कहना है कि मेले के लिए मैदान विकसित करने में सरकार को पहल करनी चाहिए।

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