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नेपाल ने चीन के सामने किया सरेंडर

नेपाल ने चीन के सामने किया सरेंडर
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भारत के साथ रिश्तों का नक्शा बिगाड़ नेपाल जिस चीन के सामने बिछ गया है वो चीन कब पूरे नेपाल को नाप देगा उसे पता तक नहीं चलेगा। चीन ने पूरे नेपाल में अपनी पैठ जमा ली है। नेपाल में चीन कई परियोजनाओं पर काम कर रहा है, इसमें बुनियादी ढांचों से जुड़ी परियोजनाएं सबसे ज़्यादा हैं, जैसे- एयरपोर्ट, रोड, अस्पताल, कॉलेज, मॉल्स और रेलवे लाइन।

चीन ने नेपाल में भी अपनी पैठ जमा लिया है। भारत से लगी सीमाओं तक अपनी पहुंच बनाने के लिए चीन नेपाल में रेल और सड़क विस्तार का काम भी शुरू कर दिया है। चीन के केरुंग से काठमांडू तक रेलवे ट्रैक का निर्माण भी काफी अहम है। चीन ने साल 2017 में नेपाल के साथ अपनी वन बेल्ट वन रोड परियोजना पर समझौता किया था। चीन ने नेपाल में रसुवा में पनबिजली प्रोजेक्ट शुरू किया है। भारत से लगी सीमाओं तक अपनी पहुंच बनाने के लिए चीन ने नेपाल में रेल और सड़क विस्तार का काम भी शुरू कर दिया है। चीन के केरुंग से काठमांडू तक रेलवे ट्रैक का निर्माण भी काफी अहम है।

नेपाल पर चीन की नजर

 

  • चीन ने साल 2017 में नेपाल के साथ अपनी वन बेल्ट वन रोड परियोजना पर समझौता किया था
  • चीन ने नेपाल में रसुवा में पनबिजली प्रोजेक्ट शुरू किया है।
  • ये तिब्बत से 32 किलोमीटर दूर है।
  • इसमें चीन ने 950 करोड़ रुपये लगाए हैं।
  • त्रिशुली में पनबिजली योजना कर काम चल रहा है।
  • 15 जिलों में फूड प्रोसेसिंग की फैक्ट्रियां लगा रहा है।
  • काठमांडु में रिंग रोड बना चुका है।
  • पोखरा एयरपोर्ट का काम करीब करीब पूरा हो चुका है।
  • पूरे नेपाल में कई होस्पिटल बना चुका है।
  • देश के कई हिस्सों में हाईवे का नेटवर्क बिछा चुका है।जाहिर है जो चीन नेपाल में इतनी प्रयोजनाओं पर काम कर रहा है वो नेपाल को अपने घुटने पर नहीं लाएगा तो और क्या करेगा।

    हर साल लाखों चीनी सैलानी के तौर पर नेपाल आते हैं। नेपाल का एक जिला है थांबे। जहां 100 चाइनीज़ रेस्ट्रां हैं। इसके अलावा होंगसी में सीमेंट की फैक्ट्रिय़ां हैं। ये तो व्यापार के तौर पर वो काम हैं जिसे चीन नेपाल में बड़े पामाने पर काम रहा है।चीन नेपाल के कब्ज़े के लिए सांस्कृतिक तौर पर भी तेज़ी से काम कर रहा है। नेपाल के कई स्कूलों में चीनी भाषा मंदारिन को पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। ये फ़ैसला चीन के उस प्रस्ताव के बाद लिया गया है जिसमें इस भाषा को पढ़ाने वाले शिक्षकों के वेतन का खर्चा वहां की सरकार ने उठाने की बात कही थी।नेपाल के एक जाने माने अख़बार के मुताबिक इन शिक्षकों के वेतन का भुगतान काठमांडू में चीनी दूतावास करता है। नेपाल में चीन अपना असर लगातार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और मंदारिन पढ़ाने के फ़ैसले को इसी नज़र से देखा जा रहा है। न सिर्फ़ व्यापार, चीन नेपाल की शिक्षा पर भी अपना दबदबा कायम करना चाहता है। कहा जा रहा है कि चीन की रणनीति पड़ोसी देशों पर अपना प्रभुत्व कायम करने की रही है।

 

नेपाली स्कूलों में चीनी भाषा पढ़ाने के खर्चे का वहन इसी रणनीति का हिस्सा है, हालांकि 2015 में नेपाल में आए भूकंप में भारत ने भी नेपाल की काफी मदद की थी और नेपाल के साथ भारत का रिश्ता भी काफी पुराना है, लेकिन लगता है कि नेपाल की आंखों पर पर्दा पड़ गया है।

हालांकि भारत के खिलाफ ओली सरकार की नीति को लेकर नेपाल के अंदर विरोध हो रहा है। लोगों का कहना है कि ओली सरकार चीन की कठपुतली बनी हुई है और अगर इससे बाज़ नहीं आई तो एक दिन नेपाल चीन का गुलाम बन जाएगा।




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Post source : Agency

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