August 10, 2022

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नैनीताल का रंग बदलता ‘रहस्यमयी ताल’

नैनीताल का रंग बदलता ‘रहस्यमयी ताल’

 

 

उत्तराखंड का नैनीताल जिला झीलों के लिए विश्वभर में मशहूर है. नैनीझील के साथ ही यहां काफी अन्य झीलें भी हैं, जो पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं. इन्हीं में एक है खुर्पाताल  की झील. इस झील की खासियत यह है कि इसका रंग बदलता रहता है. झील के रंग बदलने को लेकर कई किस्से-कहानियां हैं, तो इसका वैज्ञानिक आधार भी है.

 

 

खुर्पाताल की झील को ‘रहस्यमयी झील’ भी कहा जाता है. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस झील का रंग भविष्य का संकेत देता है, जैसे- हल्का लाल रंग, विपदा आने का संकेत है. मार्च के महीने में इसका रंग हल्का धानी हो जाता है, जो स्थानीय लोगों के अनुसार खुशहाली का प्रतीक है. मार्च-अप्रैल के महीने में यहां पाइन्स के फूल गिरते हैं. जिसकी वजह से भी झील के रंग में हल्का बदलाव दिखाई देता है. पेड़ों की परछाई भी इसके हरे रंग का एक कारण है. यहां की निवासी हंसा बिष्ट बताती हैं कि खुर्पाताल जगह पर लोगों के बसने का इतिहास करीब 200 साल पुराना है. यहां मौजूद झील ही यहां की सुंदरता की असली वजह है.

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वैसे तो इस झील के बदलते रंग के पीछे कई किवदंतियां जुड़ी हैं, हालांकि इसके पीछे कुछ वैज्ञानिक तथ्य भी हैं, जो झील का अलग-अलग रंग होने के पीछे की वजह हैं.

 

 

 

 

 

कुमाऊं विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ ललित तिवारी का कहना है कि किसी भी वॉटर बॉडी के महत्वपूर्ण भाग होते हैं, उनमें मौजूद शैवाल जिन्हें ”एलगी’ भी कहा जाता है. यह काफी तरह की होती है. इनके कलर और पिगमेंट सिस्टम के आधार पर इन्हें अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है. यह एलगी ही कहीं न कहीं झील में रंग बदलने का कारण है.

 

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