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वसीयत…  By Shashank Awasthi

वसीयत… By Shashank Awasthi

वसीयत… एक घर मे तीन भाई और एक बहन थी…बड़ा और छोटा पढ़ने मे बहुत तेज थे। उनके मा बाप उन चारो से बेहद प्यार करते थे मगर मझले बेटे से थोड़ा परेशान से थे। बड़ा बेटा पढ़ लिखकर डाक्टर बन गया। छोटा भी पढ लिखकर इंजीनियर बन गया। मगर मझला बिलकुल अवारा और गंवार ...
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वीरता, स्वाभिमान और देशभक्ति की मिसाल महाराणा प्रताप

वीरता, स्वाभिमान और देशभक्ति की मिसाल महाराणा प्रताप

Maharana Pratap Jayanti : अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 9 मई की तारीख और हिन्दू पंचांग के अनुसार उनकी जयंती हर साल ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। महाराणा की शूरवीरता से भारतीय इतिहास गुंजायमान है। इस महान योद्धा ने हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की विशाल सेना को नाको चने चबाने ...
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Dance of Shiva

Dance of Shiva

This union occurs when the two poles of energy come together. When you put on the switch, there is light, because the wires of the switch are uniting. In the same way, in ajna chakra, when union takes place, the explosion also simultaneously occurs. Then the energy created in ajna chakra moves up to sah...
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इस मंदिर में आती हैं अजीब अजीब आवाजें

इस मंदिर में आती हैं अजीब अजीब आवाजें

कई सारे मंदिरों के रहस्य ऐसे हैं जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे. हमारे देश में ऐसे कई मंदिर हैं और उनमे से ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां की मूर्तियां साक्षात इंसानों की तरह बातें करती हैं. कुछ लोगों को यह पहले वहम लगता था लेकिन अब वैज्ञानिकों ...
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मुंशी प्रेमचंद की लघुकथा: गुरु मंत्र

मुंशी प्रेमचंद की लघुकथा: गुरु मंत्र

      ‘‘घर के कलह और निमंत्रणों के अभाव से पंडित चिंतामणिजी के चित्त में वैराग्य उत्पन्न हुआ और उन्होंने सन्यास ले लिया तो उनके परम मित्र पंडित मोटेराम शास्त्रीजी ने उपदेश दिया-मित्र, हमारा अच्छे-अच्छे साधु-महात्माओं से सत्संग रहा है. यह जब किसी भलेमानस के द्वार पर जाते हैं तो गिड़-गिड़ाक...
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छोटी-छोटी बाते है जो निराश इंसान को हौसला दे सकती है

छोटी-छोटी बाते है जो निराश इंसान को हौसला दे सकती है

    कल्पना कीजिये की LIFT नहीं है और आपको आठवी मंजिल पर जाना है. सीढ़िया है पर पैरो मे तकलीफ है। ऑफिस के लिये देर हो रही है पर कोई साधन नहीं है। अचानक कोई पीछे से आकर कहता है फिक्र क्यो करते हो चलो मै लेकर चलता हू। कैसा लगेगा, आज के तनाव (stress) ...
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पापा की बेटी:  By जयंती रंगनाथन  

पापा की बेटी: By जयंती रंगनाथन  

एकबारगी मन हुआ कि घर जाने के लिए बस के बजाय ऑटो कर ले. नीले रंग के पर्स में उसकी ख़ुशियों की चाबी बना वो ऑफ़र लेटर पेट में गुदगुदी-सा कर रहा था. पर्स टटोला, दो सौ रुपए थे. ऑटो करेगी, तो सौ का पत्ता तो वहीं निकल जाएगा. नहीं, उससे अच्छा है कि जाते ...
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