August 17, 2022

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पेड़ों की जड़ों पर उकेरते हैं नक्काशी

पेड़ों की जड़ों पर उकेरते हैं नक्काशी

हम जिन भी पेड़ों की जड़ों को बेकार समझते हैं या फिर गांव घरों में जलाने के इस्तेमाल में लाते हैं, उन्हीं जड़ों को नैनीताल के रहने वाले ललित शाह अलग-अलग आकृतियों में बदलने का काम करते हैं. लगभग 30 वर्षों से भी ज्यादा समय से इस तरह की कारीगरी कर रहे ललित जंगलों, गधेरों से या फिर अपने ही क्षेत्र में आसपास मौजूद पेड़ों की जड़ों को इकट्ठा करते हैं. फिर इस पर अपनी कला से लाजवाब नक्काशी उकेरते हैं.

मुख्य रूप से ज्योलीकोट के रहने वाले ललित ‘ड्रिफ्ट वुड’ का इस्तेमाल कर उन्हें आकृतियां देकर अपनी दुकान में रखते हैं. इन कलाकृतियों के प्रति पर्यटक भी काफी आकर्षित रहते हैं और यादगार के रूप में इन्हें अपने साथ लेकर जाते हैं. अपने इस काम की वजह से साल 2009 में उन्हें ‘ड्रिफ्ट वुड’ नाम से पुरस्कार भी मिला था.

ललित बताते हैं कि वैसे तो लोग नैचुरल डिजाइन ही पसंद करते हैं, तो वह भी जंगल, गधेरों से नैचुरल डिजाइन वाली लकड़ियां ढूंढने का काम करते हैं. इसके अलावा वह कुछ लकड़ियों में मोमबत्ती या फिर टेबल स्टैंड का आकार देते हैं, जो ज्यादातर पर्यटकों को पसंद आएं. वह पिछले 35 वर्षों से इस काम को कर रहे हैं. यह सब उन्होंने अपने चाचा से सीखा है. पर्यटन सीजन के दौरान ही यह काम चल पाता है. इस काम से उन्हें सालभर में लगभग एक लाख तक की आय हो जाती है.

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ललित के चाचा बताते हैं कि कोई भी पेड़ की सूखी लकड़ी को इस्तेमाल करके आकृतियां बनाते हैं. वह पिछले 40 से भी ज्यादा वर्षों से यह काम कर रहे हैं. केवल रेती या छोटे औजारों से ही वह काम कर पाते हैं, जिसमें समय काफी लगता है. उन्होंने कहा कि अगर ब्लॉक स्तर की तरफ से भी थोड़ी मदद मिल जाए, कुछ अच्छे औजार मिल जाते हैं तो जल्दी काम हो पाएगा और कम समय में ज्यादा आकृतियां बनाई जा सकेंगी.

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