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डाॅ. धन सिंह रावत द्वारा आपदा प्रबन्धन की समीक्षा बैठक

डाॅ. धन सिंह रावत द्वारा आपदा प्रबन्धन की समीक्षा बैठक

आपदा प्रबन्धन एवं पुनर्वास राज्य मंत्री डाॅ0 धन सिंह रावत द्वारा जिला कार्यालय सभागार में आपदा प्रबन्धन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मंत्री ने जनपद आपदा प्रबन्धन, सिंचाई,, लोक निर्माण विभाग, खाद्यआपूर्ति, उत्तराखण्ड पेयजल निगम, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य, नगर निगम, नगर पालिका, पुलिस, एसडीआरएफ, इत्यादि आपदा प्रबन्धन से सीधे जुड़े विभागों के अधिकारियों से आगामी समय में आने वाले मानसूनी सीजन के मद्देनजर की गई तैयारियों, प्रशिक्षण, संसाधन, उपलब्धता और उनकी विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में नजदीकी तैनाती इत्यादि की जानकारी प्राप्त करते हुए सभी विभागों को पूरी मानसून अवधि के लिए तैयार रहने तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए।


उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं बहुतायत होती हैं, जिससे कई बार खेत-खलिहान से लेकर पशुधन तथा मानवीय हानि भी होती रहती है तथा कालसी से साहिया, चकराता, त्यूनी, लाखामण्डल, हाजा-दसोउ, क्वानू-मिनस तथा मसूरी वाले रूट पर भूस्खलन के चलते यातायात भी लगातार बाधित होता रहता है, जिससे एक ओर लोगों को अपने जरूरी सामान की किल्लत होती है तथा बागवानी करने वाले काश्तकारों की फसल मण्डी तक समय पर ना पंहुचने से खराब भी हो जाती है, इसको देखते हुए उन्होंने लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि कालसी से लेकर साहिया, चकराता, त्यूनी, क्वानू, हाजा-दसऊ, लाखामण्डल, नागथात और मसूरी वाले पहाड़ी रूटों पर पहले से ही मुख्य-मुख्य स्थानों पर जे.सी.बी मयचालक तैनात कर दें, जिससे यदि यातायात बाधित होता है तो उसको तत्काल खोला जा सके।

मंत्री ने कहा कि इसी तरह सिंचाई विभाग और पेयजल निगम भी बरसात से पूर्व भूस्खलन की रोकथाम हेतु जो सुरक्षात्मक कार्य किए जाने हैं तत्काल करें तथा मानसून अवधि में भी अलर्ट मोड पर आवश्यकतानुसार कार्य करें। उन्होंने खाद्य आपूर्ति विभाग को पर्वतीय क्षेत्रों में यातायात बाधित होने के मद्देनजर स्थानीय गोदामों में 3 माह की अग्रिम रसद पंहुचा देने के निर्देश दिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में खाद्य सामग्री को लेकर किसी भी तरह की किल्लत ना होने पाए।


मंत्री ने कहा कि प्रत्येक गांव में भी ग्राम प्रहरी की तरह एक आपदा प्रहरी का पद होना चाहिए जो लोगों को आपदा से पूर्व और आपदा के समय सचेत कर सके तथा विभिन्न विभागों से स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित करने में मददगार हो सके। उन्होंने जिलाधिकारी को इस सम्बन्ध में होमवर्क करने के निर्देश दिए। साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में आपात स्थिति में पटवारी को अपने क्षेत्र में आवागमन हेतु वाहन की व्यवस्था के लिए भी सम्बन्धित उप जिलाधिकारी से समन्वय करने को कहा।

साथ ही मंत्री ने सभी विभागांे से बजट की आवश्यकता होने पर प्रस्ताव निर्गत करने को कहा। जिलाधिकारी देहरादून डाॅ आशीष कुमार श्रीवास्तव ने माननीय मंत्री को अवगत कराया कि आगामी मानसून सीजन में पर्वतीय तथा मैदानी दोनों क्षेत्रों की प्रकृति के अनुरूप तैयार रहने के लिए उनके द्वारा सभी विभागों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं तथा विभिन्न विभागों को आपदा से सम्बन्धित किसी छोटे-बडे सुरक्षात्मक कार्यों को शीघ्रता से सम्पन्न करने हेतु आवश्यक्तानुसार टैण्डर जारी करने तथा मानसून से पूर्व सभी सुरक्षात्मक कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। समय में की जा रही तैयारियों के सम्बन्ध में पे्रजेन्टेशन के माध्यम से अवगत कराया।

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इस दौरान बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक योगेन्द्र रावत, मुख्य विकास अधिकारी नितिका खण्डेलवाल, अपर जिलाधिकारी प्रशासन बीर सिंह बुदियाल, अपर मुख्य नगर अधिकारी मोहन सिंह बर्निया, मुख्य चिकित्साधिकारी डाॅ अनूप कुमार डिमरी, जिला पूर्ति अधिकारी जसंवत कण्डारी, वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम डाॅ आर.के सिंह, सिंचाई विभाग, पेयजल निगम, लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग, नगर निगम, स्वास्थ्य आदि विभागो के अधिकारी जिला सभागार में उपस्थित थे तथा विभिन्न क्षेत्रों के उप जिलाधिकरी और अन्य विभागों के विकासखण्डों के अधिकारी वीडियोकान्फ्रेसिंग के माध्यम से जुड़े हुए थे।

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