Doonited ‘देवदार व बोगेनविलिया’ का मोहब्बतनामा, अब केवल यादों मेंHappy Independence Day
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‘देवदार व बोगेनविलिया’ का मोहब्बतनामा, अब केवल यादों में

‘देवदार व बोगेनविलिया’ का मोहब्बतनामा, अब केवल यादों में
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5 जुलाई 2015 को रविवार की सुबह ग्यारह बजे के आस-पास का समय था जब मेरे कदमों ने पहली बार अल्मोड़ा की धरती को छुआ था। मेरे लिए नया शहर था उस समय। प्राकृतिक छटा से भरपूर। जब हल्द्वानी सुबह सात बजे ट्रेन पहुंची तो तलाश हुई अल्मोड़ा जाने वाली टैक्सी की। टैक्सी से अल्मोड़ा तक का सफर काफी अच्छा रहा। पहाड़ मेरे लिए अंजान तो नहीं थे लेकिन कुमाऊँ मंडल से ये मेरा पहला परिचय था।

टैक्सी से अल्मोड़ा कब आया पता ही नहीं चला। नगरपालिका के पास उतरने पर फिर तलाश हुई रहने के लिए होटल की। नजदीकी होटल में कमरा मिल गया तो रात भर के सफर की थकान तब जाकर दूर हुई। मानसून में पहाड़ वैसे भी बहुत अलमस्त से लगते हैं और गर्मी में तो पहाड़ सुकून देते ही हैं।

दिन भर आराम करने के बाद तब तय हुआ कि थोड़ा बाजार घूमा जाये और सोमवार को ऑफिस ज्वॉइन करना था तो लोकेशन का भी पता करना था। होटल से निकलकर जब लोगों से पूछते-पूछते माल रोड़ की तरफ बढ़े तब अल्मोड़ा किताब घर तक जाकर पता लगा ऑफिस का।

तब उसी रास्ते पर पहली बार गोविन्द वल्लभ पंत पार्क के अंदर ये विशालकाय बोगेनविलिया व देवदार का पेड़ देखा था।
उसके बाद उन चार सालों में अनगिनत बार इसके आगे से, पार्क के अंदर से, सीढ़ियों से आना जाना हुआ। कई बार तस्वीरें भी ली। इनकी कहानियां भी सुनी, पढ़ी। किसी ने कहा सौ साल से अधिक पुराना है ये तो कहीं पढ़ा साठ साल पुराना है।

अल्मोड़ा के सुपर ट्री के नाम से विख्यात देवदार व बोगेनविलिया से जहाँ लोगों की बहुत सी यादें जुड़ी हैं, वहीं कॉलेज के बच्चों व कई दलों का ये मीटिंग प्वॉइंट व धरना स्थल तक भी रहा।

अल्मोड़ा की पहचान बन चुका ये पेड़ सबकी अलग-अलग भावनाओं से जुड़ा है। कोई कहता कि देवदार व बोगेनविलिया की मोहब्बत की दास्तां है ये। जैसे देवदार की बांहों में बोगेनविलिया पूरी तरह समाहित होकर देवदार को अपनी टहनियों से पूरी तरह आच्छादित कर अपने प्रेम का एहसास दिलाता हो। अप्रैल-मई से खिलना शुरु होता तो तब इसकी रौनक ही देखते बनती और बैंगनी फूलों से लदा ये विशालकाय पेड़ हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता चला जाता। पर्यटकों के लिए सैल्फी पॉइंट बन गया था ये स्थान।

आज सुबह मानसून की पहली बारिश में देवदार का वृक्ष, जो कि जड़ों से खोखला हो चुका था, वो संभल नहीं पाया और बोगेनविलिया को साथ लेकर जमींदोज़ हो गया।

इसके साथ ही #अल्मोड़ा शहर से जुड़ी, इसकी एक पहचान खत्म हो गई। अब तस्वीरों में ही रह गया दोनों का मोहब्बतनामा।
याद रहोगे तुम दोनों हमेशा…!!!

#ज्योत्सना खत्री
(तस्वीर मई 2017 की है मेरे द्वारा ली गई,
आयुष्मान भी है इस तस्वीर में।)

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