May 20, 2022

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राजाजी टाइगर रिज़र्व में शावकों के जन्म की खबर आए इसलिए बाघिनों को ट्रांसलोकेट किया गया

राजाजी टाइगर रिज़र्व में शावकों के जन्म की खबर आए इसलिए बाघिनों को ट्रांसलोकेट किया गया

जिम कॉर्बेट से राजाजी टाइगर रिज़र्व में एक बाघ और दो बाघिनों को ट्रांसलोकेट किया गया था, अब उनमें से एक बाघिन गर्भवती है. माना जा रहा है कि अप्रैल या मई तक शावकों का आगमन राजाजी रिज़र्व में हो सकता है. पार्क प्रशासन बाघिन की सुरक्षा को लेकर अलर्ट हो चुका है, तो वन्य जीव प्रेमी भी बेसब्री से शावकों के जन्म का इंतजार कर रहे हैं. बाघों की घटती संख्या के मद्देनज़र वन्यजीव प्रेमियों के साथ ही टाइगर रि​ज़र्व प्रशासन भी चाह रहा था, यहां शावकों के जन्म की खबर आए इसलिए ट्रांसलोकेशन का प्रयोग किया गया था और बड़ी खबर यह भी है कि देश में तीसरी बार यह प्रयोग सफल रहा.

राजाजी पार्क के पश्चिमी हिस्से यानी मोतीचूर रेंज में दिसंबर 2020 में एक बाघिन और इस साल जनवरी में एक बाघ को ट्रांसलोकेट किया गया था. इन दोनों को कॉर्बेट पार्क से यहां लाकर छोड़ा गया था. साल भर बाद अब इस टाइगर ट्रांसलोकेशन के सुखद परिणाम मिलने की बात कही जा रही है. कॉर्बेट से लाए गए दोनों बाघ और बाघिन मैटिंग सीज़न में इस साल जनवरी में एक साथ देखे गए. पार्क में लगे कैमरा ट्रैप में दोनों को कई बार एक साथ देखा गया. यही नहीं, उनके फिज़िकल मार्क्स भी दोनों के बीच मैटिंग की ओर इशारा कर रहे हैं.

तीनों बार सफल रहा यह प्रयोग


पार्क के डायरेक्टर अखिलेश तिवारी का कहना है कि बहुत संभावना है कि जनवरी में हुई इस मैटिंग के बाद बाघिन प्रेग्नेंट है. पार्क प्रशासन इसके लिए अब बाघिन पर बारीक़ी से नज़र रख रहा है. इधर, टाइगर ट्रांसलोकेशन का यह प्रयोग देश में तीसरी बार किया गया. इससे पहले 2008 में राजस्थान के सरिस्का और 2009 में मध्य प्रदेश के पन्ना नेशनल पार्क में यह प्रयोग सफल रहा था. उत्तराखंड में भी इसके सफल प्रयोग से वन महकमा खासा उत्साहित है.

आखिर क्यों करना पड़ा यह प्रयोग?


दरअसल, राजाजी टाइगर रिज़र्व में साल भर पहले तक मात्र 34 टाइगर थे. इनमें से 28 बाघ पार्क के सिर्फ पूर्वी हिस्से चीला, गोहरी और रवासन रेंज में हैं, तो चार बाघ पार्क के बफर ज़ोन श्यामपुर रेंज में हैं, लेकिन पार्क के पश्चिम में मोतीचूर रेंज में एक भी बाघ मौजूद नहीं था. यहां सालों से मात्र दो बाघिनें रहती थीं, जो बूढ़ी हो चुकी थीं. इस पार्ट में बाघों के समाप्त होने के पीछे अवैध शिकार, रेलवे ट्रेक और हाईवे की बाधाएं बड़ी वजहें मानी जाती रहीं. इस पार्ट में बाघों के अस्तित्व के लिए यह ट्रांसलोकेशन का प्रयोग किया गया.

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