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नैनीताल पुलिस और प्रशासन की अनदेखी का पुलिंदा तैयार

नैनीताल पुलिस और प्रशासन की अनदेखी का पुलिंदा तैयार

नैनीताल पुलिस और प्रशासन की अनदेखी का पुलिंदा इंटेलीजेंस ने तैयार किया है। इंटेलीजेंस ने एक-दो बार नहीं, बल्कि पांच-पांच रिपोर्ट भेजकर स्थान विशेष पर कार्रवाई की संवेदनशीलता को डीएम और एसएसपी को बताया था। यही नहीं हो रहे घटनाक्रम को इंटेलीजेंस मुख्यालय की डेली समरी इनफारमेशन (डीएसआई) में शामिल किया जाता था।

घटना के बाद इन सब रिपोर्ट और डीएसआई की प्रतियां इंटेलीजेंस की ओर से शासन को भेजी गई हैं, ताकि भविष्य में जो कार्रवाई हो इंटेलीजेंस की सजगता पर कोई सवाल न उठे। बनभूलपुरा एक-दो दिन का नहीं, बल्कि लंबे समय से चला आ रहा घटनाक्रम है। इसमें कई बार कोर्ट के फैसलों के बाद भी तमाम गतिरोध सामने आए हैं।

लगातार इंटेलीजेंस भी यहां की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। ऐसे में जब कार्रवाई का दिन चुना जाना था, उससे पहले ही इंटेलीजेंस लगातार अपनी रिपोर्ट भेज रही थी। इंटेलीजेंस ने जिलाधिकारी और एसएसपी नैनीताल को 31 जनवरी को दो, दो फरवरी को दो और तीन फरवरी को एक रिपोर्ट इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को लेकर भेजी थी।

यही नहीं इंटेलीजेंस ने कार्रवाई से संभावित घटनाओं को स्पष्ट कर लिखा था। बाकायदा यह भी लिखा था कि यदि कार्रवाई होती है, तो इलाके विशेष में किस तरह से विरोध प्रदर्शन किया जा सकता है। मसलन दूसरे पक्ष की रणनीति क्या है, इसके बारे में भी स्पष्ट बताया गया। बावजूद इसके हर रिपोर्ट को प्रशासन ने दरकिनार कर दिया।

इंटेलीजेंस ने सुबह के वक्त कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए कार्रवाई को शाम का वक्त चुना गया।

सूत्रों के मुताबिक, इंटेलीजेंस ने भी घटनाक्रम से पहले की अपनी तैयारियों और होमवर्क का ब्योरा शासन को भेजा है। ताकि, इस बात को समझा जा सके इंटेलीजेंस ने तो अपना काम ठीक किया, लेकिन इसे समझने और भविष्य का आकलन करने में पुलिस-प्रशासन के स्तर से ही बड़ी चूक हुई।

31 जनवरी-एक संगठन के कार्यकर्ताओं ने कुमाऊं मंडलायुक्त से कार्रवाई के संबंध में वार्ता की। उस वक्त इंटेलीजेंस ने संवेदनशीलता को स्थानीय प्रशासन को बताया।

31 जनवरी-समुदाय विशेष बहुल इलाका होने के कारण विवादित मदरसा ध्वस्त करने पर भारी विरोध की संभावना जताई। ऐसे में यथोचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया।

दो फरवरी-कार्रवाई सुबह के वक्त हो। इसकी वीडियोग्राफी की जाए। पीएसी का भ्रमण कराया जाए और धार्मिक पुस्तकों को संबंधित मौलवी के सुपुर्द किया जाए।

दो फरवरी-कब्जाधारक अब्दुल मलिक को नोटिस देने और प्रस्तावित ध्वस्तीकरण में विरोध हो सकता है।

तीन फरवरी-कार्रवाई के दौरान विरोध में बच्चों और महिलाओं को आगे खड़ा किया जा सकता है। ऐसे में बल प्रयोग में आंदोलन उग्र हो सकता है।

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