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चिपको आन्दोलन तो आपने जरूर सुना होगा : स्वरुप धस्माना

चिपको आन्दोलन तो आपने जरूर सुना होगा :  स्वरुप धस्माना

रैणी गाव शायद आपको याद न हो पर गौरादेवी का नाम आपके कानो में कभी न कभी जरूर पड़ा होगा। और चिपको आन्दोलन तो आपने जरूर सुना होगा।

  • 1974 में जब कुछ लोगो द्वारा रैणी गाव के लगभग 2400 देवदार के पेड़ो को काटने के लिए चिन्हित किया गया तो गोरादेवी ने विरोध किया और अपनी महिला साथियों के साथ पेड़ो से चिपक गयी। और शुरू हुवा चिपको आन्दोलन ।

जिसने भारत सहित विश्व में पर्यावरण संरक्षको को सोचने पर मजबूर किया । अपने एक साक्षात्कार में गौरादेवी ने कहा था ” भाइयो यह जंगल हमारी माँ के घर जैसा हैं इससे हमे फल सब्जी लकड़ी आदि मिलते हैं। इस जंगल के पेड़ कटेंगे तो एक दिन यहाँ बाढ़ आएगी । और भारी तबाही होगी।

ऋषि गंगा पवार प्रोजेक्ट के तहत इस रैनी गाव के आसपास कही पेड़ो की बली चढ़ गयी। लम्बे समय से इस बाँध का विरोध चल रहा था। बल्कि उच्च न्यायालय उत्तराखंड द्वारा भी इस पर रोक लगाने के आदेश दिए गये पर पर सरकार चुप रही।

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आज गोरा देवी की भविष्यवाणी सच साबित हुयी। प्रकृति अपना संतुलन कर बैठी। एक पेड़ को काटना सौ मनुष्यों की हत्या के समान पाप हैं।

ऋषि गंगा प्रोजेक्ट तो पुरे पर्यावरण तंत्र को तहस नहस कर के तयार हो रहा था। 8 वर्ष पूर्व इस प्रोजेक्ट का मालिक इसी जगह इस तरह की आपदा में मारा गया पर तब भी कम्पनी की समझ में प्रकृति का संदेश न आया। और आज लगभग 200 लोगो के साथ पूरा का पूरा प्रोजेक्ट धौली गंगा की लहरों में दफन हो गया। मानव को प्रकृति का संदेश समझ लेना चाहिए।

नही तो इसका परिणाम आगे और भी भयावह होगे।

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