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September 20, 2019

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आज “विश्व पर्यावरण दिवस ” है Editorial By Viren Kothiyal

आज “विश्व पर्यावरण दिवस ” है Editorial By Viren Kothiyal
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आज “विश्व पर्यावरण दिवस ” है जो कि हर साल 5 जून को मनाया जाता है।


Editorial By Viren Kothiyal

 

जहां तक मुझे याद है कि 5 जून 1995 को प्रथम पर्यावरण सम्मेलन पर ब्राजील की राजधानी रियो डी जेनैरो मे 90 देशो के राष्ट्र प्रमुखो ने ग्रीन हाउस गैसो का उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया था..मगर हुआ क्या हर साल नये संकल्प और नये नारे के साथ पर्यावरण दिवस पर भाषणबाजी ...

आज इस अवसर पर मैं यह सोचने लगा कि प्रत्येक वर्ष इसे मनाने के क्या मायने है.. ऐसा मैं इस लिए कह रहा हूं कि मैंने बचपन मे पढ़ा था कि “पर्यावरण ” का मतलब हमारे चारों ओर का प्राकृतिक आवरण, जिसमे कि हवा, पानी, जंगल, नदियां आदि सब स्वच्छ हो .. लेकिन दुख होता है कि आज ये सब कुछ प्रदूषित हो चुका है ओर साल दर साल और प्रदूषित हो रहा है ।

तो फिर हर साल हम ये दिवस क्यों मनाते हैं ..सिर्फ भाषण देने के लिए या फिर बंद वातानुकूलित कमरों मे संगोष्ठी करने के लिए या किसी ऐसे समाजसेवी संगठन को पुरस्कृत करने के लिए जिसका पर्यावरण संरक्षण से कोई लेना-देना ने हो… पर अक्सर यही होता है ।
आज हम लोग बूंद -बूंद पानी को तरस रहे है शुद्ध हवा हमे मयस्सर नही …धरती आग उगल रही ..आसमान धुंधला रहा और पहाड़ तप रहे हैं
यह सब किस लिए हो रहा ..क्योंकि हमने अपनी जरूरत के मुताबिक प्रकृति का भरपूर दोहन किया लेकिन बदले मे उसे लौटाया कुछ नही ..परिणामस्वरूप आज पहाड़ से लेकर मैदान तक कंक्रीट के जंगल पैदा हो गये और हम विकास के लिए रोटी कपड़ा और मकान की कीमत पर प्रकृति को रौंदते चले गये जिसका परिणाम आज हमारे सामने ग्लोबल वार्मिंग के रूप मे है ..

दोस्तो आप लोगो को मालूम है कि वायु प्रदूषण से हर साल विश्व मे 55 लाख लोग और अशुद्ध पानी से 8 लाख लोग मौत के मुंह मे समा जाते हैं .. लेकिन सरकारी मशीनरी कुछ नही कर पाती ..कहते है कि पर्यावरण विनाश मतलब प्राणी जाति का सर्वनाश ।
दोस्तो .. अभी भी समय है कि हम प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा अपने घर से अपने बच्चों को दें ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी जो कि देश का भी भविष्य होते है शुद्ध हवा मे सांस ले सके ..

दोस्तो भाषणबाजी सभी करते है कुछ लोग तस्वीर खिंचवा लेते हैं और कुछ पुरस्कार प्राप्त कर लेते है फिर सब कुछ भूल जाते हैं और अगले साल पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम मे फिर भाषण…
पर्यावरण संरक्षण के लिए शुरुआत आप ने और हम सब ने मिलकर करना है ..आज हम सब लोग धरती को बचाने के लिए यही शपथ लें ।

अन्त मे अपनी दो पंक्तिया कहना चाहूंगा —
“बूंद -बूंद पानी को तरसती धरती, हर एक बूंद को तड़पता इंसान .. 
आज न चेते हम तो कल बचेगा न मानव का निशान ।”

धन्यवाद …आपका दिन मंगलमय हो ।

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Post source : Viren Kothiyal

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