उत्तराखंड के सांसद ने यूपी, पंजाब और महाराष्ट्र में बांटी निधि | Doonited.India

June 27, 2019

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उत्तराखंड के सांसद ने यूपी, पंजाब और महाराष्ट्र में बांटी निधि

उत्तराखंड के सांसद ने यूपी, पंजाब और महाराष्ट्र में बांटी निधि
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उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद बने कांग्रेसी नेता राजबब्बर ने सांसद निधि खर्चने में खासी दरियादिली बरती। उत्तराखंड के सांसद के रूप में मिलने वाली निधि उन्होंने यूपी, पंजाब और महाराष्ट्र में भी खर्च की। ग्राम्य विकास विभाग से सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार, तीन साल में बब्बर अपनी निधि से यूपी, पंजाब और हरियाणा में 75 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। वर्ष 2015 में तत्कालीन सांसद मनोरमा शर्मा डोबरियाल के निधन के बाद खाली हुई सीट पर कांग्रेस ने राजबब्बर को राज्यसभा के लिए चुनकर भेजा था। तब से तीन साल हो चुके हैं और बब्बर की उत्तराखंड में आवाजाही नामभर को रही है।

प्रतिनिधि ने रखा पक्ष : मामले में सांसद से बात करने का प्रयास किया गया, पर फतेहपुर सीकरी से चुनाव लड़ रहे बब्बर से संपर्क नहीं हो पाया। दिल्ली-राजस्थान में उनके सहायकों का कहना था कि प्रचार में होने के कारण फिलहाल बब्बर बात करने की स्थिति में नहीं है। उन्हें भेजे गए वाट्सअप का भी जवाब नहीं मिला। दूसरी तरफ, उनके राज्य प्रतिनिधि मोहन सिंह ने बताया कि सांसद जी ने चमोली में लामबगड़ गांव को गोद लिया है। यहां वो 1.80 करोड़ रुपये विकास कार्य में खर्च चुके हैं। जबकि छह करोड़ रुपये से ज्यादा के काम प्रस्तावित हैं। दूसरे राज्यों में विकास कार्य कराने के बाबत मोहन का कहना था अपरिहार्य स्थिति में सांसद को यह निर्णय लेने का अधिकार है।

उत्तर प्रदेश: वर्ष 2015-16 में यूपी के रामपुर जिले के बिलासपुर क्षेत्र में सात विभिन्न कार्यों के लिए 25 लाख रुपये दिए गए हैं। यह क्षेत्र कांग्रेस के तत्कालीन उत्तराखंड राज्यसहप्रभारी संजय कपूर का क्षेत्र है। यहां रैन बसेरे, कब्रिस्तान की दीवार, सीसी रोड और पुलिया बनाई गई है।

महाराष्ट्र: नागपुर जिले साऊनेर स्थित गांव में एक पवित्र दरगाह है। यहां धर्मशाला बनाने के लिए 25 लाख रुपये सांसद निधि से दिए गए है। यह राशि वर्ष 2016-17 में दी गई।

पंजाब: 2017-18 में मुक्तसर में शिवपुरी मोक्षधाम के पास यात्री धर्मशाला के लिए भी सांसद निधि से 25 लाख रुपये दिए गए हैं।

 

सांसद बनने के बाद राजबब्बर ने उत्तराखंड से नाता ही नहीं रखा। खुद कांग्रेस वाले भी उन्हें तलाश रहे हैं कि वो हैं कहां? रही बात निधि की तो व्यक्ति जहां का प्रतिनिधित्व करता है, उसे उसी प्रदेश के हितों की चिंता करनी चाहिए, यदि यूपी से इतना ही मोह है तो सदस्यता छोड़कर वहीं चले जाएं।
डॉ.देवेंद्र भसीन, प्रदेश मीडिया प्रमुख, भाजपा   

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