चीन को चुकानी होगी मसूद अजहर को बचाने की कीमत! | Doonited.India

March 19, 2019

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चीन को चुकानी होगी मसूद अजहर को बचाने की कीमत!

चीन को चुकानी होगी मसूद अजहर को बचाने की कीमत!
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चीन ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर खूंखार आतंकवादी मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किए जाने से रोक दिया। ऐसा चौथी बार है जब चीन ने मसूद को बचाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मिले अपने विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया है।

हालांकि इसबार चीन का यह फैसला उसके लिए बुरा साबित हो सकता है। दरअसल, मसूद के लिए चीन के इस प्यार पर अमेरिका ने साफ शब्दों में कहा कि चीन ने चौथी बार ऐसा किया है। अमेरिका के अनुसार, चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को काम करने से रोक रहा है, लिहाजा इसके खिलाफ एक्शन लिया जा सकता है।

आपको बता दें कि भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस समेत अन्य देशों ने मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन चीन द्वारा वीटो पॉवर का इस्तेमाल किए जाने के कारण इन प्रयासों पर पानी फिर गया।

एक आतंकी के लिए चीन का प्यार दुनिया भर में नफरत में बदलता दिख रहा है। चीन के इस फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है। वहीं अमेरिका ने चीन को चेतावनी देते हुए कड़े शब्दों में कहा कि, “एक ओर चीन दक्षिण एशिया में शांति की बात करता है और दूसरी ओर मसूद को बचाता है, ऐसा कर चीन खुद ही आतंकवाद के सफाए में बाधा बन रहा है।”

आपको बता दें कि मसूद अजर पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख आतंकी है, जो भारत के खिलाफ जंग में शामिल होने का दावा करता है। मसूद अजहर भारत में हुए कई भीषण आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है। यहां तक की जम्मू-कश्मीर में 14 फरवरी को भारतीय सुरक्षाबलों पर हुए भीषण आतंकी हमले की जिम्मेदारी भी मसूद के संगठन जैश ने ही ली है। सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के अन्य देशों में भी मसूद आतंकी हमला कराता रहा है।

संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को विश्व आतंकी घोषित करने को लेकर P-3 देशों के प्रस्ताव को वीटो करना चीन को महंगा पड़ सकता है।

ऐसा इसलिए कि UNSC के अन्‍य चारों स्‍थायी सदस्‍य (अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस ) मसूद अजहर को ग्‍लोबल आतंकी घोषित करना चाहत थे लेकिन चीन के अडि़यल रुख की वजह से यह प्रस्‍ताव पास नहीं हो सका।

अब अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस ने साफ संकेत दिया है कि सुरक्षा परिषद के अन्‍य स्‍थायी सदस्‍य चीन के खिलाफ अन्‍य विकल्‍पों पर विचार कर सकते हैं। UNSC में यह पहला मौका नहीं है, बल्कि चौथा मौका था जब चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल कर P-3 देशों के प्रस्‍ताव को गिरा दिया।

चीन के इस अडि़यल रुख से अन्‍य सदस्‍य देशों में गहरा आक्रोश है। अमरीका ने तो साफ कह दिया है कि वो अपना प्रयास जारी रखेगा। चीन ने प्रस्ताव का विरोध कर अच्‍छा नहीं किया है।

UNSC के अन्‍य स्‍थायी सदस्यों ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह अपनी इस नीति पर ही कायम रहता है तो भी अन्य वैकल्पिक कार्रवाइयों पर विचार किया जा सकता है। सुरक्षा परिषद के एक राजनयिक ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि चीन इस प्रस्ताव को रोकने की नीति जारी रखता है तो अन्य जिम्मेदार सदस्य सुरक्षा परिषद में ऐक्शन लेने पर मजबूर हो सकते हैं। बेहतर यही होगा कि ऐसी स्थिति पैदा न हो।

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Post source : Agencies

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