दो गुटों में बंट गई है टीम इंडिया | Doonited.India

July 18, 2019

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दो गुटों में बंट गई है टीम इंडिया

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विश्व कप में टीम इंडिया अपनी खेली की वजह से नहीं खेमेबाजी की वजह से सेमीफाइनल मैच हारी है। बताया जा रहा है कि इस वक्त में दो खेमा बना हुए है। लेकिन टीम में चलती सिर्फ कैप्टन कोहली और कोच रवि शास्त्री की है। खबरों की मानें तो इसी खेमेबाजी की वजह से अंबाती रायुडू को टीम में नहीं लिया गया और उनकी जगह विजय शंकर को चौथे नंबर का खिलाड़ी बनाया गया। टीम में कोई खिलाड़ी इन दोनों के खिलाफ कुछ भी बोलने से कतराता है क्योंकि सबको पता है कि जो विरोध करेगा उसे कभी ना कभी बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।

डर की वजह से कोच रवि शास्त्री और कप्तान कोहली का विरोध कोई नहीं करता। अगर भारतीय टीम विश्व कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से इतनी बुरी तरह हारकर बाहर हुई तो उसकी सबसे बड़ी वजह कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली की एकतरफा सोच है जो वे टीम पर थोपते हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) के प्रमुख विनोद राय कोहली को बहुत पसंद करते हैं। बीसीसीआइ के तीनों पदाधिकारियों के पास इतनी शक्ति नहीं हैं कि वे टीम के मसले पर कुछ बोलें। उनके मुखिया एमएसके प्रसाद किसी भी कीमत पर शास्त्री और विराट का विरोध नहीं कर सकते हैं।

कोहली और कोच शास्त्री की लॉबी इतनी मजबूत है कि जो उनसे पंगा लेता है उसे बाहर का रास्ता देखना पड़ता है। यही वजह है कि चैंपियंस ट्रॉफी की हार के बाद लीजेंड अनिल कुंबले का विराट से मतभेदों के कारण मुख्य कोच का पद छोड़ना पड़ा। विदेशों में मिली कई बार के बाद भी न तो कोहली और न ही कोच पर कोई कार्रवाई की गई। चाहे बात दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट सीरीज में 1-2 की पराजय की हो या इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-4 की हार, विनोद राय से जब भी मीडिया ने पूछा तो उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कदम उठाने की बात की, लेकिन आज तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। अगर उस समय एक्शन ले लिया जाता तो टीम में हिटलरशाही में लगाम लग जाती और शायद टीम इंडिया सेमीफाइनल से इतनी बुरी तरह से बाहर नहीं होती।

आज कल टीम इंडिया में चयन का पैमान प्रदर्शन नहीं बल्कि पसंद बन गया है। भारतीय टीम में वही खिलाड़ी खेलते हैं जिन्हें या तो प्रदर्शन के आधार पर बाहर नहीं किया जा सकता जैसे रोहित शर्मा और जसप्रीत बुमराह या फिर जो विराट कंपनी के सदस्य हैं। फिलहाल टीम में दो खेमा बन गया है। एक खेमा उप कप्तान रोहित के साथ है तो दूसरा कप्तान विराट के साथ। ऐसे ही एक पसंद के खिलाड़ी हैं केएल राहुल। बताया जा रहा है कि केएल राहुल का प्रदर्शन जैसा भी हो वो टीम में बने रहेंगे। उन्हें तब तक मौके दिए जाएंगे जब तक वह वापसी ना कर लें। अगर ओपनिंग में मौका होगा तो उन्हें वहां इस्तेमाल किया जाएगा, अगर चौथे नंबर पर मौका होगा तो वहां जगह दी जाएगी। अगर कहीं मौका नहीं होगा तो वह अंतिम-15 में तो रहेंगे ही और जैसे ही किसी का प्रदर्शन खराब होगा या कोई चोटिल होगा, उन्हें वापस अंतिम एकादश में शामिल कर लिया जाएगा।

यही नहीं, कुलदीप यादव और युजवेंद्रा सिंह चहल में चाहे कोई भी खराब प्रदर्शन करे, अंतिम एकादश से बाहर तो कुलदीप ही होंगे, क्योंकि चहल रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर में विराट की कप्तानी में खेलते हैं। 2015 विश्व कप के बाद से भारतीय टीम चौथे नंबर के बल्लेबाज की खोज कर रही थी जो अंबाती रायुडू पर जाकर पूरी हो गई थी। न्यूजीलैंड के खिलाफ वेलिंगटन में तीन फरवरी को भारत के चार विकेट 18 रन पर गिर गए थे। चौथे नंबर पर उतरे अंबाती रायुडू ने 113 गेंदों पर 90 रनों की पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई थी। जहां ट्रेंट बोल्ट सहित न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की गेंदें भयानक स्विंग कर रही थीं। उस मैच में रायुडू ने आठ चौके और चार छक्के मारे थे। उसी न्यूजीलैंड ने पिछले मैच में भारत के तीन विकेट पांच रन पर गिरा दिए थे, लेकिन टीम के पास रायुडू नहीं थे और नतीजा आपके सामने है। आइपीएल से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया भारत दौरे पर आई और रायुडू शुरुआती तीन मैचों में 13, 18 और 02 रन बनाकर आउट हो गए। अगले दो मैचों में उन्हें नहीं खिलाया गया। जिस चार नंबर के लिए रायुडू को चुना गया था, उन्हें तीन मैच के खराब प्रदर्शन के बाद विश्व कप टीम से ही बाहर कर दिया गया और विजय शंकर को टीम में ले लिया गया।

रायुडू को तो बाहर ही किया जाना था बस उसके खराब प्रदर्शन का इंतजार हो रहा था। कप्तान को रायुडू कभी पसंद नहीं था, इसीलिए उसने टीम चयन के बाद थ्रीडी चश्मे वाला कमेंट किया था। यही नहीं, जब शिखर धवन और विजय शंकर चोटिल हुए और बैकअप में होने के बाद भी उसका चयन नहीं हुआ तो उसने खुन्नस में संन्यास ले लिया। उसे पता था कि अब उसका चयन होना ही नहीं है, तो गिड़गिड़ाने से क्या फायदा।

टीम इंडिया के खिलाड़ी कोच और कप्तान से परेशान हैं। खबर है कि ज्यादातर खिलाड़ी कोच और कप्तान की विदाई का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि एक खिलाड़ी के तौर पर कोहली को हर खिलाड़ी पसंद करता है लेकिन कप्तानी के तौर पर विराट टीम की पसंद नहीं बताए जा रहे हैं।फिलहाल विराट की कप्तानी पर अभी संकट नहीं दिखाई दे रहा है और शास्त्री का कार्यकाल 45 दिन के लिए बढ़ाया जा चुका है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि उनका कार्यकाल ऐसे समय में खत्म हो रहा था, जब नया कोच चुनने के लिए कम वक्त था, लेकिन अब उन्हें पूर्णकालिक कार्यकाल मिलने की गुंजाइश कम ही नजर आ रही है।

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Post source : Danik Jagran

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