August 04, 2021

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महान कवि तुलसीदास ने बताई स्त्रियों के बारे में ये जानकारी

महान कवि तुलसीदास ने बताई स्त्रियों के बारे में ये जानकारी

आज हम महान कवि तुलसीदास के बारे में बात करेंगे जिन्होंने अपने समय में औरतों से जुड़ी बहुत सी ऐसी बातें कही थी जो मनुष्य जीवन में बहुत अधिक महत्व रखती है।
ये बात तो आप सभी जानते ही होंगे की हमारे शास्त्रों में मनुष्य के दिनचर्या से लेकर हर तरह की समस्या का निदान व जानकारी मिल जाती है जी हां कुछ इसी तरह से हमारे शास्त्रों में स्त्रियों के बारे में भी विशेष वर्णन किया गया है जिसे जानने के बाद स्त्रियों को समझना कुछ हद तक आसान हो जाता है। वैसे ये बात भी सच है कि नारी भारतीय परिवारों में लक्ष्मी का स्वरूप मानी गई है। मां अन्नपूर्णा ने उन्हें पोषण का वरदान दिया है। यह बहुत पुरानी सूक्ति है कि जहां नारी को पूजा जाता है वहां देवता रमण करते हैं। अलग-अलग शास्त्रों में सौभाग्यवती स्त्री के कुछ लक्षण वर्णित है।

आज हम आपको एक मशहूर व जाने माने कवि द्वारा बताई गई कुछ बातों को बताएंगे जो कि स्त्रियों से संबंधित है जी हां हम बात कर रहे हैं महान कवि तुलसीदास जी की जिन्होने अपने समय में स्त्रियों से जुड़ी बहुत सी ऐसी बातें कही थी जो मनुष्य जीवन में बहुत अधिक महत्व रखती है। तो आज हम आपको उन बातों के बारे में बताने जा रहे हैं आइए जानते हैं

‌तुलसीदास जी ने अपने दोहे के जरिए बताया है कि एक स्त्री बेहद खूबसूरत होती है और उसके पीछे कोई भी व्यक्ति मूर्ख बन जाता है यहां तक कि एक समझदार व्यक्ति भी मूर्ख बन उसके पीछे पीछे घूमता है। ठीक उसी तरह से मोर भी देखने में खुबसूरत होता है पर वो जब सांप खाता है तो वो सब भूल जाता है यानि की कहने का मतलब सिर्फ इतना है की भूल से भी किसी भी व्यक्ति को खूबसूरती के पीछे नहीं भागना चाहिए।

इतना ही नहीं इसके अलावा कवि तुलसीदास जी कहना है कि जो व्यक्ति महान या किसी महात्मा पुरुष की बात नहीं मानता है वह पतन के गहरे गड्ढे में चला जाता है जिस तरह से बाली ने अपनी पत्नी की बात ना मानते हुए वह कार्य किए जो उसे नहीं करने चाहिए थे उसे हार का मुंह देखना पड़ा और खुद के प्राण भी गंवाने पड़े।

 स्त्री से संबंधित कुछ गोपनीय बातें

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वहीं स्त्री के बारे में दूसरी बात तुलसीदास जी कहते हैं की जो पुरुष अपनी स्त्री और मां के अलावा बाकी सभी स्त्रियों को बहन और मां का दर्जा देते हैं उनके हृदय में स्वयं भगवान वास करते हैं और उनका हृदय बेहद ही शुद्ध और पवित्र होता है।

इसके अलाबा तुलसीदास जी ये भी कहते हैं कि हमें अपने जीवन में धीरज, धर्म, मित्र और पत्नी की परीक्षा मुश्किल घड़ी में ही लेनी चाहिए क्योंकि उस समय में पता चलता है कौन अपना है या कौन पराया। तुलसीदास जी का कहना है की गुरु, राजनेता और वैद्य यदि आप से स्वार्थ भाव रखते हुए प्यार से बात करते हैं तो इन तीनों के जीवन का जल्द ही विनाश हो जाता है। तुलसीदास जी साफ रूप से यह कहना चाहते हैं कि किसी भी पद पर आसीन रहते हुए यदि आप अपने स्वार्थ के बारे में सोचते हैं तो जल्द ही आपकी सत्ता का विनाश निश्चित है।

महान कवि तुलसीदास ने बताई स्त्रियों के बारे में ये जानकारी…

1) धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परखिए चारी।।
तुलसीदास का कहना था कि वक्त खराब होने पर धीरज, मित्र, धर्म और नारी की परीक्षा होती है क्योंकि अच्छे वक्त में तो सब साथ देते हैं लेकिन बुरे वक्त में कोई भी साथ नहीं देना चाहता है । इसलिए उस वक्त नारी यानी कि स्त्री की भी परीक्षा होती है।

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2) जननी सम जानहिं पर नारी। तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे।।
तुलसीदास का कहना था कि जो पुरुष अपनी पत्नी को छोड़कर बाकियों को अपनी मां-बहन के बराबर समझता है उसके मन में ईश्वर वास करते हैं।

3) तुलसी देखि सुबेषु भूलहिं मूढ़ न चतुर नर। सुंदर केकिहि पेखु बचन सुधा सम असन अहि।।
तुलसीदास का कहना था कि सुंदरता देखकर बुद्धिमान से बुद्धिमान व्यक्ति भी मूर्ख हो जाता है । सुंदरता के पीछे कभी नहीं भागना चाहिए । जैसे कि मोर सुंदर है लेकिन वह आखिर सांप को ही खाता है ।

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