प्राचीन मंदिर में होती है मेंढ़को की पूजा | Doonited.India

July 18, 2019

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प्राचीन मंदिर में होती है मेंढ़को की पूजा

प्राचीन मंदिर में होती है मेंढ़को की पूजा
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आपने भगवान शिव के अनेको मंदिर के बारे में सुना होगा साथ ही आप ने उनके दर्शन भी किए होंगे, लेकिन क्या आप ने एक ऐसे मंदिर के बारे में सुना है जहां भगवान शिव के साथ – साथ एक मेंढक कि भी पूजा होती है। मेंढक की पूजा ये सुनने में काफी अजीब लगता है लेकिन ये बात सच है उत्तर प्रदेश में बने इस मंदिर के अंदर भगवान शिव के साथ एक मेंढक कि भी पूजा होती है।

भारत के अंदर करीब 12 ऐसे मंदिर है जहां भगवान शिव की बहुत मान्यता है और ये भारत के सबसे प्रमुख पवित्र स्थलों में से एक हैं क्योंकि यही से ही भगवान शिव का अस्तित्व शुरू हुआ था। वैसे तो भक्तों ने भगवान शिव के इन 12 प्रमुख स्थलों के दर्शन किए हैं लेकिन अभी भी कुछ स्थानों से लोग अनभिज्ञ हैं। जी हां, लखीमपुर खीरी में भगवान शिव का एक पुराना और भव्य मंदिर हैं जिसके बारे में लोग कम ही जानते हैं।

इस मंदिर की खासियत

इस मंदिर के अंदर भगवान शिव की पूजा तो ही है साथ ही मेंढको को भी पूजा जाता है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित शिव मंदिर में भगवान शिव एक मेंढक की पीठ पर विराजमान है। मेंढ़क की पीठ पर विराजमान होने के कारण इस मंदिर को मेंढ़क मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। 100 फिट कि ऊंचाई वाले इस मंदिर के अंदर कई कलाएं स्थापित है और ये बात जानकर आपको काफी हैरानी होगी ये मंदिर यूपी में ही नहीं बल्कि दुनिया में काफी प्रचलित है यहां पर्यटक दूर दूर से आते हैं भ्रमण करने साथ ही भगवान शिव के अनोखे स्वरूप के दर्शन करने।

बता दें कि, इस मंदिर की ख़ास बात ये है कि यहां नर्मदेश्वर महादेव का शिवलिंग अपना रंग बदलते रहता है और यहां पर खड़ी नंदी की मूर्ति है जो लोगों और पर्यटक के आर्कषण का केंद्र है। मंदिर राजस्थानी स्थापत्य कला एवं तांत्रिक मण्डूक तंत्र पर बना है। मंदिर के बाहरी दीवारों पर शव साधना करती उत्कीर्ण मूर्तियां हैं जो इस मंदिर की सुंदरता में चार चांद लगा देता है। कहा जाता है कि यह मंदिर ओयल स्टेट के राजा बख्त सिंह ने करीब 200 साल पहले बनवाया था।

ओयल स्टेट के राजा ने किया था इस मंदिर का निर्माण

दरअसल, ओयल स्टेट के राजा बख्त सिंह जब युद्ध पर विजय प्राप्त करके लौटे थे तब उन्होंने युद्ध में जीते हुए पैसों का सदुपयोग करते हुए इस मंदिर के निर्माण में लगाया था। लेकिन वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जाता है कि अकाल से पीछा छुड़ाने के लिए तांत्रिक की सलाह पर इस मंदिर को बनाया गया था। वहीं अगर बात कि जाए इस मेंढक मंदिर के निर्माण कि तो इस मंदिर के चारों कोनों पर सुंदर गुम्बद बने हुए हैं साथ ही इस मंदिर के ऊपर कई कलाकृतियां बनी हुई है जो देखने में काफी आर्कषक और सुंदर है। मंदिर का छत्र भी सूर्य की रोशनी के साथ पहले घूमता था पर अब वो छतिग्रस्त पड़ा है।

मेंढक मंदिर की एक ख़ास बात ये है कि इसके अंदर एक कुआं भी है, जमीन तल से ऊपर बने इस कुए में जो पानी रहता है वो जमीन तल पर ही रहता है। इसके अलावा खड़ी नंदी की मूर्ति मंदिर की विशेषता है, मंदिर का शिवलिंग भी बेहद खूबसूरत है और संगमरमर के कसीदेकारी से बनी ऊंची शिला पर विराजमान है।

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