Story By Vinit Kumar Jain: अरे सुन.. हम ऋषिकेश जा रहे हैं कल | Doonited.India

October 14, 2019

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Story By Vinit Kumar Jain: अरे सुन.. हम ऋषिकेश जा रहे हैं कल

Story By Vinit Kumar Jain: अरे सुन.. हम ऋषिकेश जा रहे हैं कल
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मैने ये दो साल पहले ऋषिकेश के लिए लिखा था, पीड़ा थी, वाइरल भी खूब हुईं थी।पर विडंबना है, स्थिति सुधरने की जगह और ज्यादा विकराल हो गयी है.. और पूरे उतरखण्ड प्रदेश के लिए। अब दो साल बाद इन शब्दों के अर्थ और भी ज्यादा गहराते जा रहे हैं।।
आज के परिपेक्ष मे महसूस कीजिये… पर साथ ही प्रदेश के भविष्य के २ साल बाद का आकलन भी अभी करते चलियेगा..
प्रस्तुत है –

Story By Vinit Kumar Jain: अरे सुन.. हम ऋषिकेश जा रहे हैं कल

रे सुन.. हम ऋषिकेश जा रहे हैं कल. तुझे भी चलना है तो बता? -क्या करेंगे ??? अरे क्या करेंगे मतलब.? मस्ती करेंगे .. हाँ राफ्टिंग भी करेंगे, कैंप देख लेंगे कोई,, आराम से मिल जाते हैं , हाँ बियर भी रख लेना यार. हाँ 7 लोग हो गए हम, हो जायेंगे सेट एक ही कार में , 5-6 घंटे का ही तो रास्ता है. कौन रोक रहा है? बाकी देख लेंगे रास्ते में… अरे चल ले, कुछ ख़ास खर्च नहीं आना,, मैं दे दूंगा, कौन सा वहां से कुछ खरीदना है हमें बडी. उल्टा, फिरंगी देखेंगे. लगेगा ही नहीं तुझे कि तू इंडिया में है. चल. बस तफरी कर के परसों सोमवार को सुबह ऑफिस,, मूड फ्रेश हो जाएगा , चल ऑफिस के बाद तैयार रहना,, तुझे भी ले लेंगे साथ………….

बस… कुछ ऐसा ही सोचना आपका भी है तो बुरा न मानिए ,, आप नहीं चाहिए हमें…ओह अच्छा , हाँ पहले अपना परिचय करा दू आपसे .. बस इतना जानिए अभी कि मैं ऋषिकेश का ही रहने वाला हूँ…!. इतना ही परिचय जानिये.

ऋषिकेश का एक शहरी होने के नाते सच कह रहा हु , अगर आपका उद्देश्य भी केवल ‘मस्ती” ही है तो सच में आप नहीं चाहिए हमें : आप जहाँ है, वहीँ रहिये,,

क्षमा करें,कडवी बात है, पर सच में ऐसा लगता है: ऋषिकेश की हवा बदल रही है.मेरा ऋषिकेश भविष्य में कैसा होगा? …

आप जानते हैं ऋषिकेश की आत्मा क्या है?? ऋषिकेश को योग नगरी कहा जाता है, यहाँ माँ गंगा है, शान्ति है, आध्यात्म है , यहाँ एक सकारात्मक ऊर्जा है, कारण जानते हैं?? यह नगर मठ-मंदिरों की भूमि है, अनंत सालों से यहाँ मंत्रोच्चार और गंगा आरती गूँज रही है, मंदिर में घंटो की आवाज इस ऊर्जा को उत्पन्न करती हैं.गंगा की कल -कल मन को प्रफुल्लित करती हैं,

पर दुःख है आजकल ये ऊर्जा नकाराताम्कता में धीरे धीरे परिवर्तित हो रही है….

पर रुकिए एक मिनट .. ना-ना ….मैं अकेले आपको ही इस बात के लिए दोष नहीं दे रहा , दोषी तो खुद हम ही हैं. इसमें आपका दोष नहीं है केवल, ‘एडवेंचर’ को हम ने ही तो मस्ती के साथ जोड़ दिया , हमने ही तो एडवेंचर की नयी परिभाषा गढ़ के आपके सामने प्रस्तुत की है – “मस्ती-बियर और एडवेंचर “

एक मिनट ..कोई अलग राय मत बनाइये. हाँ .मैं साहसिक खेलो का पक्षधर हु, ये एक नया ऋषिकेश है, ऋषिकेश का नया आयाम है.. यहाँ के युवाओं ने खुद को मेहनत से इस क्षेत्र में प्रस्तुत किया और साबित किया की वो जो कर रहे हैं, कहीं आसपास के क्षेत्रों में संभव नहीं है,

 

 

पर, एक छोटी सी चूक हो गयी हमने ही कभी ध्यान नहीं दिया- साहसिक खेल के नाम पर हम क्या प्रस्तुत कर रहे हैं? कैसे ध्यान देते, खुद से ही सीखा और खुद ही स्वयम को साबित भी किया युवाओं ने…तो ये चूक लाजमी ही है.

हम ही शुरू से इस बात पर नहीं अड़े : कुछ भी हो जाए हम गंगा किनारे शराब नहीं देंगे, हम नॉन वेज़ नहीं परोसेंगे, काश, पहले दिन से हमने ही अपना मेनू अपनी गढ़वाली संस्कृति पर रखा होता, उत्तराखंड का पारंपरिक खाना होता, उससे दो फायदे होते हमें…उत्तराखंड में अपरोक्ष रूप से पलायन रोकने में मदद मिलती, दूसरा, आप भी हमारे खान-पान की संस्कृति से रूबरू होते, पर दुःख है, हमने ही स्वयं ये शुरुआत नहीं की..

हमने ही कभी आपसे ये पहल नहीं कि. आप कैंप में रूक रहे है तो तडके ही उठ कर कर योग क्लास भी ले… हम तो बस इस पहल में ही रहे कि बस फ़टाफ़ट आपको राफ्ट लेकर गंगा में उतार दें….

बहुत दुःख होता है कि योग और ध्यान सीखने के क्रम में ऋषिकेश के योग टीचर के पास विदेशियों की तुलना में भारतीय युवाओं की संख्या बहुत कम है…

आप इच्छा जाहिर कीजिये, ऋषिकेश के योग गुरु जहाँ पूरे विश्व के साधकों को प्रशिक्षित कर रहे हैं, आपको भी जरूर करेंगे.

ऋषिकेश में बहुत कुछ है जो यहाँ की प्रकृति हमें निरंतर सिखाती है…इश्वर ने इस धरती को जितना सौन्दर्य प्रदान किया है वो अतुलनीय है… पर दुःख होता है जब ट्रेकिंग करते हुए रास्ते में बियर केन , बोतलें . कोल्ड ड्रिंक और चिप्स के खाली पैक बिखरे हुए मिलते हैं, देखो दोस्त, ये प्रकृति है- हम इसे जो देते हैं, बदले में ये वही हमें ब्याज समेत चुकाती हैं….. हम इसे गन्दा कर रहे हैं,

यहाँ, अगर आप महसूस करेंगे तो नयी ऊर्जा का संचार आप में होगा… आँख मूँद कर गहरी लम्बी सांस लेकर खुद को महसूस करेंगे तो आप पायेंगे, ये आपके जीवन का एक अमूल्य पल है , जिसको बयान ही नहीं कर सकते,और इसके बदले में हम बस आपसे कुछ ज्यादा नहीं मांग रहे हैं, बस इतना ही .. कि ये कूड़ा आप कहीं भी न फेंक, एकत्र रखें, और नियत स्थान पर फेंक दे….बस. इतना ही ; आप जब अगली दफा ऋषिकेश आयेंगे तो बदलाव् खुद ही महसूस होगा.

पर . मैं सारा दोष आपको दे रहा हु , मेरा ये मतलब नहीं है बिलकुल भी…यहाँ तो कुछ गलत हम ही तो हैं, क्यूँ नहीं हमने ही एक नियम बना लिया था, कि हर आने वाले टूरिस्ट से हम कहीं भी एक पेड़ लगवाएंगे : उसकी ऋषिकेश यात्रा को समर्पित… उनमे से अभी तक 10 प्रतिशत पेड़ भी बचे रह जाते तो हमारा और आपका एक बहुत बड़ा योगदान इस हरित क्रान्ति में होता. पर हम अभी भी तो नहीं जाग रहे हैं, इसके लिए आपको भी तो दोष नहीं दे सकता…

मैं मानता हु, आपकी दिनचर्या ही इनती व्यस्त है , सप्ताह में एक छुट्टी तो बनती ही है,… इससे बिलकुल सहमत हूँ. पर ये हफ्ते की आखिरी छुट्टी ही गड़बड़ करती हैं.. आपके लिए पूरे 7 दिन हम तैयार हैं… बस अपनी यात्रा को अच्छे से प्लान कीजिये… आप क्या करना चाहते हैं यहाँ.. आखिर सोचिये , आप अभी जो यहाँ पर कर रहे हैं, काफी कुछ प्रतिशत मस्ती तो आप अपने शहर में ही कर सकते थे, आप बार भी जा सकते थे, डिस्कोथेक जा सकते थे, मस्ती कर सकते थे, उसके लिए इनती लम्बी और थकान भरी ड्राइव करके क्या फायदा?

और हाँ, आपके मेट्रो सिटी की तुलना में मेरा शहर बहुत छोटी जगह है, 8 लेन सड़के नहीं है यहाँ, इसलिए जाम भी लगता है, इसमें शायद कोई दोषी नहीं है, बस थोडा सा सहयोग कीजिये, धैर्य रखिये, होड़ नहीं कीजिये..

ऋषिकेश को वैसे जीने के कोशिश कीजिये, जैसा ये है,.. ऋषिकेश की आत्मा को जानिये… कैंप आपकी प्रतीक्षा में हैं, राफ्टिंग आपकी अगली चुनौती हैं, बड़े सारे एडवेंचर हैं जो आपको कहीं नहीं मिलेंगे, पर दोस्त , कभी ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट की आरती भी देखो न,, परमार्थ निकेतन की आरती देखो, कभी सुबह-सवेरे शांत मन से आस्था पथ पर चहलकदमी कर के तो देखो, वो अहसास कहीं नहीं मिलेगा , मेरा दावा है आपको…कभी माँ गंगा सेवा के लिए अपना कुछ प्रतिशत दीजिये, यहाँ अनेको ऐसी आध्यात्म की जगह हैं जो पूरे विश्व में कहीं नहीं मिलती, ऋषिकेश पुराणों में वर्णित धरा है, उस पर मंथन कीजिये कभी.. ये धरती हृषिकेश नारायण की की है, चारधाम यात्रा का द्वार है. तपोभूमि है : तभी तो पूरे विश्व के देशों के नागरिक ऋषिकेश खींचे चले आते हैं, यहाँ सेवा करते हैं..और यहाँ से जाने के बाद भी दुबारा आने चाहते है ;शीघ्रतम!

ऋषिकेश उत्तराखंड प्रदेश में है. यहाँ का बाज़ार भी देखिये. बहुत कुछ अनूठा मिलेगा…यहाँ की संस्कृति सहेज कर ले जाइये. रात में अगर गंगा घाट पर बैठकर कर ध्यान करेंगे तो आपको लगेगा कि हाँ , ये वही पल है जिससे आपकी घंटो की ये कार ड्राइव सार्थक हुयी है…

आपका नजरिया ही बदल जाएगा ….

एक बात बताइए , आप के शहर में माँ गंगा नहीं है न? बस उसकी गोद में कुछ पल बिताइए… हमारे यहाँ मॉल्स नहीं है, पब नहीं हैं, हो सकता है बहुत अच्छे शोरूम भी नहीं हैं.

दौडती-हांफती ज़िन्दगी भी नहीं है, ये सब तो आपके शहर में है ही, और बहुत अच्छे ही कलेवर में है. वही तो छोड़ कर यहाँ आये हैं आप यहाँ…उस भीड़ से, आपाधापी से दूर …और यहाँ , ऋषिकेश में जो हैं, वो संसार में कहीं नहीं है.

एक शान्ति है. दिव्यता है… ऋषिकेश में रहना सच में एक सम्मान की बात है,

कोशिश करिए, ऋषिकेश जैसा है उसे वैसा ही जिया जाए… इसे बदसूरत न किया जाए, इसकी छवि को धूमिल न किया जाए, यहाँ ज़िन्दगी जीने के लिए आइये, आपका स्वागत है… जिस दिन इस भावना से आयेंगे, सोच बदल जायेगी आपकी,, पूर्णतया……

ऐसा है अपना ऋषिकेश….  अद्भुत. अप्रतिम और दिव्य

Credits : Vinit Kumar Jain

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Post source : Vinit Kumar Jain

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