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December 09, 2019

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द्वाराहाट: महापाषाण कालीन ओखली खोज निकाली है

द्वाराहाट: महापाषाण कालीन ओखली खोज निकाली है
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अल्मोड़ा : पौराणिक द्वारका की ऐतिहासिक जालली घाटी एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। करीब चार वर्ष पूर्व पुरातात्विक महत्व वाले जोयूं गांव के खेतों की जोताई व खोदाई के दौरान मिली समाधियों व नरकंकालों के अवशेषों के बाद शनिवार को इसी क्षेत्र में एक और महापाषाण कालीन कपमार्क्स (ओखली) खोज निकाली है। जोयूं में पहले ही मौजूद 11 व 22 ओखलियों वाले महापाषाणकालीन प्रस्तरखंडों के बाद इस मेगलिथिक ओखली के मिलने से साफ हो गया है कि यहां धान की खेती हजारों वर्ष पहले से होती आई है। पुरातत्व के जानकारों ने इसे पाली पछाऊं क्षेत्र के बहाने उत्तराखंड के सांस्कृतिक इतिहास को उजागर करने वाला महत्वपूर्ण अवशेष माना है।

पुरातात्विक लिहाज से उर्वर जालली घाटी के मुनियाचौरा में मिली ओखली की प्राचीनता का अनुमान तीन से चार शताब्‍दी ईस्वी पूर्व तक किया जा सकता है। डॉ. तिवारी ने बताया कि स्थानीय बुजुर्ग इसे पांडवकालीन ओखली मान रहे हैं। मगर इतिहासकार उत्तराखंड के कपमार्क्स (ओखलियों) को आद्य इतिहास काल और वैदिक काल के मेगलिथिक कल्चर का खुलासा करते हैं।

डॉ. मोहन चंद्र तिवारी, पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर दिल्ली विवि एवं शोधकर्ता ने बताया कि जालली घाटी में प्रागैतिहासिक काल के अवशेष मिलते रहे हैं। जोयूं के खेतों से खोजी गई 11 व 22 ओखलियों वाले पाषाणखंड पहले से ही अंतरराट्रीय स्तर के शोधकर्ताओं के लिए रहस्य बने हैं। मुनियाचौरा में मिली ओखली महापाषाणकाल की है। ओखलियां बताती हैं कि इस घाटी में धान की खेती ईसा से तीन चार हजार वर्ष पूर्व से होती आ रही है।

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Post source : agency & jnn

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