डंपर से कुचलकर हुई छात्रा की मौत के बाद शहर में उबाल | Doonited.India

July 18, 2019

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डंपर से कुचलकर हुई छात्रा की मौत के बाद शहर में उबाल

डंपर से कुचलकर हुई छात्रा की मौत के बाद शहर में उबाल
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डंपर से कुचलकर हुई छात्रा की मौत के बाद शहर में उबाल है। लेकिन हैरत की बात यह है कि शिमला बाईपास पर मौत के नाम से कुख्यात हो चुके डंपरों को चालक 100 की रफ्तार से दौड़ाते हैं। कारण यह है कि उन्हें प्रति चक्कर 500 रुपये मिलते हैं। लिहाजा, ज्यादा से ज्यादा फेरे लगाने के चक्कर संकरे मार्ग को डंपरों की रेस का ट्रैक बन गया है। इसी रेस में आए दिन इस सड़क पर हादसे हो रहे हैं। बीते एक साल में शिमला बाईपास पर हुए हादसों में करीब 24 लोगों की मौत हो चुकी है।

बड़ोवाला में शिमला बाईपास हाईवे पर तेज गति से दौड़ रहे बजरी से भरे डंपर ने ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा को कुचल दिया। छात्रा की दर्दनाक मौत से गुस्साए क्षेत्रवासियों का गुस्सा फूट पड़ा और शव सड़क पर रखकर साढ़े चार घंटे जाम लगा दिया। गुस्साए क्षेत्रवासियों ने पुलिस सुरक्षा में मौजूद चालक को दारोगा की कार से बाहर निकलकर जमकर पीट दिया। विरोध करने पर लोगों ने दारोगा से भी हाथापाई की। गुस्साई भीड़ ने ट्रक पर पथराव कर शीशे तोड़ डाले। एसएसपी और डीएम के आश्वासन के बाद भी जाम न खुलने पर पुलिस ने लाठियां फटकारकर भीड़ को खदेड़ा।

घटना गुरुवार सुबह 7:20 की है। पटेलनगर थाना क्षेत्रांतर्गत गणेशपुर निवासी ताजबर सिंह बिष्ट दिल्ली में एक निजी कंपनी में काम करते हैं, जबकि उनका परिवार गणेशपुर में रहता है। ताजबर सिंह की पुत्री मानसी बिष्ट (15) घर के समीप स्थित न्यू ऐरा एकेडमी स्कूल में कक्षा ग्याहवीं की छात्रा थी। रोजाना की तरह गुरुवार की सुबह वह घर से पैदल निकली थी। तभी पड़ोसी के आने पर छात्रा ने लिफ्ट ले ली। छात्रा स्कूल के सामने शिमला बाईपास हाईवे रोड पुल के समीप बायीं ओर उतर गई, जबकि पीछे से तेज गति से ही बजरी से भरे डंपर ने मानसी को चपेट में लेकर कुचल दिया। मानसी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस सूचना पर मानसी के परिजन और क्षेत्रवासी सैकड़ों की संख्या में मौके पर पहुंचे और वहां से गुजर रहे अन्य ट्रक पर पथराव कर चालक को पीट दिया।

लोगों ने उक्त चालक की गलती नहीं होने पर उसे छुड़ा दिया, जबकि कुछ लोगों ने घटना कर भाग रहे चालक को ट्रक समेत पकड़ लिया। लोगों ने चालक की जमकर धुनाई कर दी। इस पर निजी कार से पहुंचे दरोगा ने चालक को लोगों की पकड़ से छुड़ा लिया और कार में बैठाकर जाने लगे। इससे गुस्साए लोगों ने बाइक से पीछा कर कार को कुछ ही दूर पर रुकवाकर चालक को खींच लिया। लोगों ने कार से उतारकर चालक को बुरी तरह पीट दिया, जबकि विरोध करने पर लोगों ने दारोगा के साथ गाली गलौज कर हाथापाई कर धक्का दे दिया। वहीं, घटनास्थल पर परिजनों और लोगों ने मानसी के शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। दरोगा की सूचना पर एसपी देहात प्रमेंद्र डोबाल, सीओ शेखर जुयाल समेत पुलिस फोर्स मौके पर पहुंचा। पुलिस ने उन्हें समझाया, लेकिन डीएम को बुलाने की मांग पर लोग अड़े रहे। घटना के करीब साढ़े चार घंटे पहुंचे डीएम सी रविशंकर और एसएसपी निवेदिता कुकरेती से वार्ता के बाद भी लोगों ने जाम नहीं खुला। पुलिस ने लाठियां फटकारकर तीन किलोमीटर तक लगे जाम को खुलवाया। एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि डंपर नो एंट्री के समय में कहां से आया, इसकी जांच कर सख्त कार्रवाई होगी।

बाईपास पर आलम यह है कि डंपरों को देखकर लोगों में दहशत भरी हुई है। छोटे बच्चे हों या फिर बुजुर्ग, सभी इन्हें मौत के नाम से बुलाते हैं। जो हादसे दिन के उजाले में होते हैं वे सुर्खियां बन जाते हैं, लेकिन न जाने कितने छोटे बडे़ हादसे रात के अंधेरे में होते हैं।

इनमें से कुछ लोगों का तो यही नहीं पता चलता कि उन्हें कौन टक्कर मारकर चला गया। जांच होती है तो पता चलता है कि रात में वे किसी डंपर का ही शिकार हुए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि डंपर चालकों में जल्दी फेरे लगाने में होड़ लगी रहती है, इसके चलते यहां हर दिन छोटे बड़े हादसे होते हैं।
इन डंपरों में नदियों से खनन सामग्री लाई जाती है। एक चक्कर के लिए डंपर चालक को 500 रुपये मिलते हैं। ज्यादा फेरे लगाने के चक्कर में चालक डंपरों को बेतहाशा दौड़ते हैं।

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PS: Amar Ujala

कहने को तो शिमला बाईपास पर डंपरों और भारी वाहनों के लिए केवल छह घंटे की एंट्री है। रात 11 बजे के बाद सुबह पांच बजे तक ही डंपर और भारी वाहन शिमला बाईपास रोड पर चल सकते हैं। लेकिन, मृत्युदूत बने डंपर यहां 24 घंटे धमाचौकड़ी मचाते हैं। बृहस्पतिवार को जिस डंपर से हादसा हुआ वह भी सुबह चार बजे नया गांव चौकी के सामने से निकला था, लेकिन बीच में अपने मालिक के घर रुक गया।

इंस्पेक्टर सूर्यभूषण नेगी ने बताया कि जिस डंपर से हादसा हुआ उसके चौकी पर सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए हैं। यह डंपर सुबह चार बजे चौकी के सामने से निकला था। चूंकि, उस वक्त एंट्री रहती है तो उसे नहीं रोका गया। इसके बाद वह आगे जाकर अपने मालिक शहीद के घर पेलियो में रुक गया और वहां से उसे बड़ोवाला में खनन सामग्री आठ जे डालनी थी। इसके लिए वह पेलियो से सुबह सात बजे निकला था। इस तरह डंपर चालक ने पुलिस को भी चकमा दिया।

इसी तरह डंपर वाले जानबूझकर ट्रंकों को चेकिंग प्वाइंट के आगे पीछे रात में रोक लेते हैं। फिर दो चेकिंग प्वाइंट के बीच में ही फेरे लगाते हैं। यही कारण है कि पुलिस की पकड़ में भी यही बात नहीं आती है। ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि जब पुलिस को इस बारे में पता है तो इस सब पर रोक लगाने के लिए अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?  दरअसल, शहर में सेंट ज्यूड्स चौराहे पर नो एंट्री का बोर्ड टंगा हुआ है। इसके बाद इस तरह का एक बोर्ड नया गांव चौकी के पास भी लगा हुआ है। बोर्ड पर लिखा है कि यहां सुबह पांच बजे से रात 11 बजे तक डंपर व भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है।

लेकिन, इन बोर्ड का न तो डंपर चालकों पर कोई असर है और न ही इनकी लाज पुलिस रखती है। हर दिन डंपर यहां फॉर्मूला वन जैसी रेस लगाते हैं। बाईपास पर डंपरों और भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंधित समय की व्यवस्था तीन साल पहले तत्कालीन एसएसपी डॉ. सदानंद दाते के आदेशों के बाद की गई थी।

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Post source : AGENCIES

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