परियोजना प्रभावितों की मांग नहीं मानी तो रूद्रप्रयाग जनपद होगा बंद  | Doonited.India

December 11, 2018

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परियोजना प्रभावितों की मांग नहीं मानी तो रूद्रप्रयाग जनपद होगा बंद 

परियोजना प्रभावितों की मांग नहीं मानी तो रूद्रप्रयाग जनपद होगा बंद 
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• प्रभावितों की रोजी-रोटी छीनी तो होगी आर-पार की लड़ाईः डिमरी 
• संघर्ष समिति की तिलवाड़ा में हुई बैठक में आंदोलन की बनी रणनीति
रुद्रप्रयाग: चारधाम परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति की बैठक में मुआवजे और पुनर्स्थापना की मांग को लेकर आंदोलन की रूपरेखा तय की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि 30 नवंबर को जिलाधिकारी से मुलाकात कर माँगों के निस्तारण के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। सरकार ने इस समयावधि में मांगे नहीं मानी तो रुद्रप्रयाग जनपद पूर्ण रूप से बंद कर प्रदर्शन किया जाएगा। इस मौके पर संघर्ष समिति का भी विस्तार किया गया।

संघर्ष समिति के अध्यक्ष मोहित डिमरी की अध्यक्षता में तिलवाडा में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि अब समय आर-पार की लड़ाई लड़ने का आ गया है। सरकार प्रभावितों की माँगों पर गौर नहीं कर रही है। ऐसे में प्रभावित व्यापारी और भवन स्वामियों के सम्मुख आंदोलन के सिवाय दूसरा कोई विकल्प नहीं है। बैठक में संघर्ष समिति के अध्यक्ष मोहित डिमरी ने कहा कि चार धाम परियोजना के निर्माण से व्यापारियों और भवन स्वामियों पर बहुत बड़ी आपदा आ गई है। उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि हम रोड चैड़ीकरण का विरोध नहीं कर रहे। लेकिन प्रभावितों की रोजी-रोटी छीनी जाती है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रभावितों को अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर उतरना ही होगा। प्रभावितों के समर्थन में पूरा जनपद खड़ा है।

व्यापार मण्डल के प्रदेश सचिव प्रदीप बगवाडी, वरिष्ठ व्यापारी माधो सिंह नेगी, जोत सिंह बिष्ट ने कहा कि हजारों की संख्या में व्यापारी और भवन स्वामी प्रभावित हो रहे हैं। व्यापारियों के सामने सबसे बड़ा संकट नए सिरे से व्यापार खड़ा करने का हो गया है। हमारी सरकार से यही मांग है कि प्रभावित व्यापारियों के लिए कॉम्प्लेक्स बनाए जाए। व्यापार संघ अध्यक्ष तिलवाडा सुरेंद्र दत्त सकलानी, व्यापार संघ अध्यक्ष चंद्रापुरी हिम्मत सिंह गुसाँई, अध्यक्ष सुमाडी विक्रम सजवान, दलवीर सिंह भंडारी, सुदर्शन चैहान, लक्ष्मण भंडारी ने कहा कि सरकार प्रभावितों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। पहाड़ पहले ही पलायन के चलते खाली हो रहा है और अब सरकार द्वारा लाई गई इस आपदा के चलते पहाड़ पूरा ही खाली हो जाएगा। सरकार प्रभावितों की माँगों पर गौर नहीं करेगी तो व्यापारी आंदोलन के लिए विवश होंगे। खांकरा व्यापार संघ अध्यक्ष बुद्धिबल्लभ ममगाई ने कहा कि चारधाम परियोजना के चलते खांकरा बाजार और पूरी बछणस्यूं पट्टी पूरी तरह राजमार्ग से कट रही है। हमारी माँग है कि सिरोबगढ और खांकरा बाईपास पर तीन पुल के स्थान पर दो पुलों का ही निर्माण हो। ताकि खांकरा बाजार प्रभावित होने से बच जाए।

इस मौके पर संघर्ष समिति ने आंदोलन की रणनीति बनाते हुए निर्णय लिया कि संघर्ष समिति परिवहन एवं भूतल मंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और विधायकों से भी मुलाकात कर अपनी बात रखेगी। संभव हुआ तो प्रधानमंत्री से भी मुलाकात का समय लिया जाएगा। इससे पूर्व 30 नवम्बर को जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया जाएगा। ज्ञापन में शासन और प्रशासन को माँगों के निराकरण को एक हफ्ते का समय दिया जाएगा, इसके बाद भी मांगे पूरी नहीं होती है तो एक हफ्ते बाद पूरा जनपद बंद किया जाएगा। इस मौके पर केपी ढ़ौंडियाल, कृष्णानन्द डिमरी, राय सिंह रावत, डॉ अमित रतूड़ी, अजय भंडारी, वीरेंद्र सिंह सिंधवाल, सचेंद्र रावत, तरुण पंवार, वीरेंद्र सिंह बिष्ट, मान सिंह जगवान, गोविंद सिंह जगवान, तरुण पंवार, रोशन लाल, राय सिंह बर्त्वल, मासूम खान, हर्षवर्धन सती समेत अन्य प्रभावित मौजूद थे। 
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