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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर गोष्ठी आयोजित 

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देहरादून: सोसाइटी, फार हैल्थ, ऐजूकेशन एंड वूमैन इम्पावरमेन्ट ऐवेरनैस जाखन के द्वारा राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ एवं कन्या भ्रूण हत्या एक अपराधिक कृत्य गोष्ठी का आयोजन संजय आॅर्थोपीड़िक, स्पाइन एवं मैटरनिटी सेन्टर में किया गया। डाॅ0 सुजाता संजय ने बताया कि हमारी सेवा सोसाइटी का उद्देश्य महिलाओं व बच्चियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। इसी उद्देश्य के तहत पिछले सात साल में कई निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर एक तरफ बेटियों को आगे बढ़ाने की बातें हो रही हैं तो दूसरी तरफ महिलाओं से जुड़े अपराधों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जब बेटियां बचेंगी ही नहीं तो आगे कैसे बढ़ेंगी। लिंगानुपात अभी भी साम्य को तरस रहा है। प्रतिकूल हालात में भी हमारी बालिकाएं हर क्षेत्र में नाम कमाने को आतुर हैं। सुजाता संजय ने बताया कि बालिकाएं हमारे देष के उज्ज्वल भविश्य का प्रतीक है उन्हें पढ-लिखकर अपने परिवार का ही नहीं अपितु देष का भी भविश्य सवांरना है।

डाॅ0 सुजाता संजय ने चिंता जताते हुए कहा कि अगर बेटी पैदा नहीं होगी, तो बहू कहाॅ से लाएगें? और इसलिए जो हम चाहते हैं वो समाज भी तो चाहता है। हम यह तो चाहते हैं कि बहू तो हमें पढ़ी-लिखी मिले, लेकिन बेटी को पढ़ाना है तो कई बार सोचने के लिए मजबूर हो जाते है। अगर बहू पढ़ी-लिखी चाहते हैं तो बेटी को भी पढ़ाना यह हमारी जिम्मेदारी बनता है। अगर हम बेटी को नहीं पढ़ायेगें, तो बहू भी पढ़ी-लिखी नहीं मिलेगी। यह अपेक्षा करना अपने साथ बहुत बड़ा अन्याय है।

हमें यह सोचना चाहिए कि विकास के पायदानों पर चढ़ने के बावजूद भी आखिर क्यों आज इस देश की बालिका भ्रूण हत्या, बाल विवाह, दहेज मृत्यु के रूप में समाज में अपने औरत होने का दंश झेल रही है? लोगों के  सामने तो हम बड़ी-बड़ी बातें करते हैं कि बालिका भी देश का भविष्य है लेकिन जब हम अपने अंदर झाॅकते है ंतब महसूस होता है कि हम भी कहीं न कहीं प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इसकी हत्या के कहीं न कहीं प्रतिभागी रहे हैं। यही कारण है कि आज देष में घरेलू हिंसा व भ्रूण हत्या संबंधी कानून बनाने की आवश्यकता महसूस हुई।

शिक्षित समाज में भी कई ऐसी बुराईयाँ घर कर लेती है जिसकी वजह से लड़की को एक बोझ के रूप में देखा जाता है, जिसमें दहेज का स्थान पहला है. सबसे ज्यादा दहेज का लेन-देन शिक्षित समाज में ही होता है. जबकि दहेज लेना और देना कानूनी अपराध है। सेवा सोसाइटी के सचिव डाॅ0 प्रतीक ने कहा कि महिलाएं खुद को कमजोर न समझें, आज महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में चाहे वह कला हो या विज्ञान या तकनीक, पुरूशों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, इसलिए उन्हें सम्मान मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाएं चाहें तो भ्रूण हत्या को रोक सकती है।

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